शेयर करेंकोई भी सामान्य पढ़ा लिखा व्यक्ति भी ज्योतिबा फुले के उपर्युक्त दस बिन्दुओं में वर्णित सामाजिक, धार्मिक और राजनितिक विचारों को पढ़कर आसानी से समझ जायेगा की तथाकथित बुद्धिजीवी और समाज सुधारक का ज्ञान कितना सतही, अज्ञानतापूर्ण से लेकर मूर्खतापूर्ण, सच्चाई से परे से लेकर सच्चाई के विपरीत, पूर्वाग्रह से ग्रस्त और काल्पनिक है. अगर मैं सभी दस बिन्दुओं की खामियों को विस्तार से बखिया उधेड़ना शुरू करूँगा तो एक किताब भी कम पर जायेगा, इसलिए, एक एक कर संक्षेप में बात रखता हूँ… 1. फुले चातुर्वर्ण्य व्यवस्था को अन्यायपूर्ण, अमानवीय और शोषणकारी मानते थे। उनका मानना था कि…
अज्ञानी बुद्धिजीवी, दलित समाज के पथभ्रष्टक ज्योतिबा फुले भाग-1
शेयर करेंअज्ञानता बुद्धिजीवी होने की निशानी नहीं है। सनातनी संस्कार के कारण अक्सर हिन्दुओं (हिन्दू, बौद्ध, सिक्ख, जैन) के मुंह से सुनते हैं सभी धर्म एक समान है। सभी धर्म प्यार, मोहब्बत और इंसानियत की शिक्षा देते हैं। कोई भी धर्म हिंसा नहीं सिखाता, आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। अल्लाह, ईश्वर, गॉड सब एक है आदि। ऐसा वही लोग कहते हैं जो सच्चाई से अनभिज्ञ होते हैं। जिन्हें इसाईयत और इस्लाम का इतिहास पता नहीं होता है। जो अरब और यूरोप का इतिहास नहीं जानते हैं और जिन्होंने कुरान और हदीस नहीं पढ़ा है। अगर वे पढ़े होते कि…
इस्लाम और इसाईयत का संक्षिप्त इतिहास
शेयर करेंहॉलीवुड के फिल्मों में आपने देखा होगा बाहर से कोई ड्रैकुला आकर शहर के किसी व्यक्ति को सम्मोहित कर या घात लगाकर शिकार करता है। फिर वह भी ड्रैकुला बन जाता है और वह भी दुसरे लोगों को शिकार बनाने लगता है। जब लोगों को यह बात पता चलती है तो वे ड्रैकुला से बचने की पूरी कोशिश करते हैं, जद्दोजहद करते हैं। फिर भी ड्रैकुला अगर किसी प्रकार उसे शिकार बना लेता है तो वह भी ड्रैकुला बन जाता है और इंसानों का शिकार करने लगता है। जोम्बीज की स्थिति थोड़ा और खतरनाक होता है। इसके पास दिमाग…
हिन्दुस्थान में हिंदुओं की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार कौन भाग-2
शेयर करेंपाकिस्तान बनाने वाले देशद्रोही मुस्लिमों का कांग्रेस में शामिल हो जाना और सत्ता पर कांग्रेस की पकड़: देश में सांप्रदायिक सौहार्द, एकता और अखंडता को वास्तविक खतरा छद्म धर्मनिरपेक्षवादियों से है. मुस्लिम लीग के जिन नेताओं ने बंटवारे का समर्थन किया वे विभाजन के बाद पाकिस्तान नही गए. वे रातोरात कांग्रेस में शामिल हो गए. पार्टी बदलने से उनकी मानसिकता नही बदली. वही विभाजनकारी मानसिकता सेकुलरवाद के नाम पर पोषित हो रही है. धूर्त मियां जवाहरलाल के समय से ही एसी मानसिकता बना दी गयी है कि मुस्लिमों के बुरे से बुरे कार्यों का यदि विरोध किया जाता है…
हिन्दुस्थान में हिंदुओं की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार कौन भाग-1
शेयर करेंक्या इस बात से असहमत हुआ जा सकता है की १९४७ में धर्म पर आधारित भारत विभाजन पश्चात यदि सभी हिंदू, बौद्ध, सिक्ख, जैन हिन्दुस्थान में आ जाते और सभी मुस्लिम पाकिस्तान और बंगलादेश चले जाते तो आज हम भारतीय इस्लामी आतंकवाद, अलगाववाद, कट्टरवाद, बम ब्लास्ट, सांप्रदायिक दंगे, छद्मधर्मनिरपेक्षवाद, घृणित वोट बैंक की राजनीती, जनसंख्या विस्फोट, बेरोजगारी, गरीबी आदि से इस कदर पीड़ित नही होते? यदि बंटवारे के समय हिंदुओं (हिन्दू, बौद्ध, सिक्ख, जैन) का पाकिस्तान और बंगलादेश से स्थानांतरण हिन्दुस्थान में हो जाता तो वे जो बंटवारे के समय पाकिस्तान बांग्लादेश में करोड़ों में थे आज महज कुछ हजारों…
संविधान में उल्लिखित पंथनिरपेक्षता का स्वरूप और उसका राजनीतिक दुरूपयोग
शेयर करेंहम सभी अपने देश, अपनी सभ्यता, अपनी संस्कृति और अपने धर्म से प्यार करते है, उसका पालन करते हैं। हम सभी धर्मों का समान आदर कर सकते है पर हम धर्मनिरपेक्ष कैसे हो सकते है? धर्मनिरपेक्षता राज्य की प्रकृति है व्यक्ति का नहीं। धर्मनिरपेक्ष राज्य का उत्तरदायित्व है कि वह पक्षपात रहित होकर सभी धर्मों और मताबलम्बियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करे। भारतीय संविधान में उल्लिखित पन्थनिरपेक्षता का यही आशय है। पर नेहरु और कांग्रेस शासित भारत में धोखे से धर्मनिरपेक्ष होने और धर्मनिरपेक्षता बनाये रखने की जिम्मेदारी भारतीय सभ्यता, संस्कृति, धर्म , परम्परा को माननेवाले मूलनिवासियों पर…
ताजमहल, कुतुबमीनार में देवमूर्तियाँ निकलने लगी तो नेहरु, इंदिरा ने क्या किया?
शेयर करेंमहान राष्ट्रवादी इतिहासकार स्वर्गीय पुरुषोत्तम नागेश ओक लिखते हैं कि, “ताजमहल, कुतुबमीनार या फतेहपुर सीकरी या सुल्तान गढ़ी आदि स्थलों से देवमूर्ति या संस्कृत शिलालेख जो प्राप्त होते रहे हैं उन्हें गुल और गुम करके उनकी प्राप्ति के सम्बन्ध में पूरी गुप्तता बरती जाती है. जब कुतुबमीनार परिसर से देवमुर्तिया निकाली जाने लगी तब पुरातत्व विभाग ने कुतुबमीनार के इर्दगिर्द ऊँची कनात खड़ी कर चोरी छिपे उत्खनन किया ताकि वह हिन्दू स्थल होने की बात किसी को ज्ञात न हो.” ताजमहल, कुतुबमीनार, फतेहपुर सीकरी, सुल्तान गढ़ी, हुमायूँ का मकबरा, निजामुद्दीन की दरगाह आदि सारी ऐतिहासिक इमारतें इस्लाम पूर्व हिन्दू…
राणा सांगा एक महान योद्धा
शेयर करेंसमाजवादी हरा आमी ने भारत के जिस महानायक, महान योद्धा को “गद्दार” कहकर राज्यसभा में संबोधित किया, आईये जानते हैं कि वे कौन थे! महाराणा सांगा अर्थात महाराणा संग्राम सिंह। इस महान योद्धा के बारे में आप जितना पढ़ेंगे, उतना ही आश्चर्य में डूबते चले जायेंगे। लगभग सौ युद्ध और अधिकांश में विजय! शरीर के हर अंग पर युद्ध के चिन्ह सजाए इस रणकेसरी को खंडहर, सैनिकों का भग्नावशेष आदि कहा गया है … जैसे रणचंडी ने उन्हें अपने हाथों से पुरस्कार स्वरूप घावों के आभूषण पहनाए हो। एक योद्धा की एक आँख चली गयी..किसी दूसरे युद्ध में एक…
द्रविड़ आन्दोलन की आड़ में राष्ट्रविरोधी षडयंत्र और जयललिता
शेयर करें१८५७ की राष्ट्रव्यापी प्रथम स्वतंत्रता संघर्ष में जब समस्त भारतीय अंग्रेजों के विरुद्ध खड़े थे उस दौरान भी जब नव मतांतरित भारतीय ईसाई समाज पूर्ण रूप से स्वाधीनता के विरोध में और अंग्रेजों के साथ खड़े हो गए तो अंग्रेजों को भारत में अपना साम्राज्य स्थायी बनाने की उम्मीद जग गयी। इस उम्मीद को अमलीजामा पहनाने के लिए सर्वप्रथम हिंदुओं को लोभ, लालच, नौकरी में आरक्षण आदि के माध्यमों से ईसाई मतों में धर्मान्तरण को बढ़ावा दिया गया, दूसरे स्तर पर शिक्षा को मिशनरियों के सहयोग से सेकुलर यानि राष्ट्र विरोधी, हिंदू विरोधी और अंग्रेजी राज परस्त बनाया गया।…
खिलाफत आन्दोलन का समर्थन गाँधी का राष्ट्रविरोधी कुकृत्य
शेयर करेंप्रथम विश्व युद्ध में जब स्थिति बदली तो तुर्की अंग्रेजों के विरुद्ध और जर्मनी के पक्ष में हो गया। विश्व युद्ध में जर्मनी की पराजय के पश्चात अंग्रेजों ने तुर्की को मजा चखने के लिए तुर्की को विघटित कर दिया। अंग्रेज तुर्की के खलीफा के विरोध में सामने आ गए। मुसलमान खलीफा को अपना नेता मानते थे। उनमे अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह की लहर दौड़ गई। भारत के मुस्लिम नेताओं ने इस मामले को लेकर अंग्रेजों के विरुद्ध सन १९२१ मैं “खिलाफत आन्दोलन” शुरू किया। मुस्लिम नेताओं तथा भारतीय मुसलमानों को खुश करने के लिए गाँधी जी ने मोतीलाल…








