फूट डालो राज करो
आधुनिक भारत, नवीनतम शोध, राष्ट्रीय मुद्दे

ब्रिटिश नीति फूट डालो राज करो के मोहरे और टूलकिट

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1857 की स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई ने भारत में ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी। अंग्रेजों को अपनी सत्ता क्या जान पर भी खतरा महसूस होने लगा था। ऐसी समस्या दुबारा उत्पन्न न हो इसके लिए अंग्रेजों ने फूट डालो राज करो की नीति अपनाई। अंग्रेजों को लगा कि हिन्दू भारत में अंग्रेजों की सत्ता कभी स्वीकार नहीं करेंगे। इसलिए उन्होंने अपने जैसे ही विदेशी मुस्लिम आक्रमणकारियों के वंशज मुसलमानों को अपने पक्ष में कर 1857 की हिन्दू मुस्लिम एकता को भंग करने की रणनीति बनाई। मुसलमानों को अपने पक्ष में करने के लिए उसने मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति…

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आधुनिक भारत, नवीनतम शोध, राष्ट्रीय मुद्दे

अज्ञानी बुद्धिजीवी, दलित समाज के पथभ्रष्टक ज्योतिबा फुले भाग-2

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कोई भी सामान्य पढ़ा लिखा व्यक्ति भी ज्योतिबा फुले के उपर्युक्त दस बिन्दुओं में वर्णित सामाजिक, धार्मिक और राजनितिक विचारों को पढ़कर आसानी से समझ जायेगा की तथाकथित बुद्धिजीवी और समाज सुधारक का ज्ञान कितना सतही, अज्ञानतापूर्ण से लेकर मूर्खतापूर्ण, सच्चाई से परे से लेकर सच्चाई के विपरीत, पूर्वाग्रह से ग्रस्त और काल्पनिक है. अगर मैं सभी दस बिन्दुओं की खामियों को विस्तार से बखिया उधेड़ना शुरू करूँगा तो एक किताब भी कम पर जायेगा, इसलिए, एक एक कर संक्षेप में बात रखता हूँ… 1.         फुले चातुर्वर्ण्य व्यवस्था को अन्यायपूर्ण, अमानवीय और शोषणकारी मानते थे। उनका मानना था कि जाति…

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आधुनिक भारत, नवीनतम शोध, राष्ट्रीय मुद्दे

अज्ञानी बुद्धिजीवी, दलित समाज के पथभ्रष्टक ज्योतिबा फुले भाग-1

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अज्ञानता बुद्धिजीवी होने की निशानी नहीं है। सनातनी संस्कार के कारण अक्सर हिन्दुओं (हिन्दू, बौद्ध, सिक्ख, जैन) के मुंह से सुनते हैं सभी धर्म एक समान है। सभी धर्म प्यार, मोहब्बत और इंसानियत की शिक्षा देते हैं। कोई भी धर्म हिंसा नहीं सिखाता, आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। अल्लाह, ईश्वर, गॉड सब एक है आदि। ऐसा वही लोग कहते हैं जो सच्चाई से अनभिज्ञ होते हैं। जिन्हें इसाईयत और इस्लाम का इतिहास पता नहीं होता है। जो अरब और यूरोप का इतिहास नहीं जानते हैं और जिन्होंने कुरान और हदीस नहीं पढ़ा है। अगर वे पढ़े होते कि यूरोप,…

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आधुनिक भारत, नवीनतम शोध, मध्यकालीन भारत, राष्ट्रीय मुद्दे

इस्लाम और इसाईयत का संक्षिप्त इतिहास

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हॉलीवुड के फिल्मों में आपने देखा होगा बाहर से कोई ड्रैकुला आकर शहर के किसी व्यक्ति को सम्मोहित कर या घात लगाकर शिकार करता है। फिर वह भी ड्रैकुला बन जाता है और वह भी दुसरे लोगों को शिकार बनाने लगता है। जब लोगों को यह बात पता चलती है तो वे ड्रैकुला से बचने की पूरी कोशिश करते हैं, जद्दोजहद करते हैं। फिर भी ड्रैकुला अगर किसी प्रकार उसे शिकार बना लेता है तो वह भी ड्रैकुला बन जाता है और इंसानों का शिकार करने लगता है। जोम्बीज की स्थिति थोड़ा और खतरनाक होता है। इसके पास दिमाग नहीं…

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हिंदू
आधुनिक भारत, राष्ट्रीय मुद्दे

हिन्दुस्थान में हिंदुओं की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार कौन भाग-2

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पाकिस्तान बनाने वाले देशद्रोही मुस्लिमों का कांग्रेस में शामिल हो जाना और सत्ता पर कांग्रेस की पकड़: देश में सांप्रदायिक सौहार्द, एकता और अखंडता को वास्तविक खतरा छद्म धर्मनिरपेक्षवादियों से है. मुस्लिम लीग के जिन नेताओं ने बंटवारे का समर्थन किया वे विभाजन के बाद पाकिस्तान नही गए. वे रातोरात कांग्रेस में शामिल हो गए. पार्टी बदलने से उनकी मानसिकता नही बदली. वही विभाजनकारी मानसिकता सेकुलरवाद के नाम पर पोषित हो रही है. धूर्त मियां जवाहरलाल के समय से ही एसी मानसिकता बना दी गयी है कि मुस्लिमों के बुरे से बुरे कार्यों का यदि विरोध किया जाता है तो…

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हिंदू
आधुनिक भारत, राष्ट्रीय मुद्दे

हिन्दुस्थान में हिंदुओं की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार कौन भाग-1

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क्या इस बात से असहमत हुआ जा सकता है की १९४७ में धर्म पर आधारित भारत विभाजन पश्चात यदि सभी हिंदू, बौद्ध, सिक्ख, जैन हिन्दुस्थान में आ जाते और सभी मुस्लिम पाकिस्तान और बंगलादेश चले जाते तो आज हम भारतीय इस्लामी आतंकवाद, अलगाववाद, कट्टरवाद, बम ब्लास्ट, सांप्रदायिक दंगे, छद्मधर्मनिरपेक्षवाद, घृणित वोट बैंक की राजनीती, जनसंख्या विस्फोट, बेरोजगारी, गरीबी आदि से इस कदर पीड़ित नही होते? यदि बंटवारे के समय हिंदुओं (हिन्दू, बौद्ध, सिक्ख, जैन) का पाकिस्तान और बंगलादेश से स्थानांतरण हिन्दुस्थान में हो जाता तो वे जो बंटवारे के समय पाकिस्तान बांग्लादेश में करोड़ों में थे आज महज कुछ हजारों और…

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ताजमहल - कुतुबमीनार
आधुनिक भारत, मध्यकालीन भारत

ताजमहल, कुतुबमीनार में देवमूर्तियाँ निकलने लगी तो नेहरु, इंदिरा ने क्या किया?

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महान राष्ट्रवादी इतिहासकार स्वर्गीय पुरुषोत्तम नागेश ओक लिखते हैं कि, “ताजमहल, कुतुबमीनार या फतेहपुर सीकरी या सुल्तान गढ़ी आदि स्थलों से देवमूर्ति या संस्कृत शिलालेख जो प्राप्त होते रहे हैं उन्हें गुल और गुम करके उनकी प्राप्ति के सम्बन्ध में पूरी गुप्तता बरती जाती है. जब कुतुबमीनार परिसर से देवमुर्तिया निकाली जाने लगी तब पुरातत्व विभाग ने कुतुबमीनार के इर्दगिर्द ऊँची कनात खड़ी कर चोरी छिपे उत्खनन किया ताकि वह हिन्दू स्थल होने की बात किसी को ज्ञात न हो.” ताजमहल, कुतुबमीनार, फतेहपुर सीकरी, सुल्तान गढ़ी, हुमायूँ का मकबरा, निजामुद्दीन की दरगाह आदि सारी ऐतिहासिक इमारतें इस्लाम पूर्व हिन्दू क्षत्रिय…

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दलित-मुस्लिम
आधुनिक भारत, राष्ट्रीय मुद्दे

दलित मुस्लिम भाई भाई: दलितों के विरुद्ध एक खतरनाक षडयंत्र

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जब मुस्लिम मुस्लिम भाई भाई नहीं हो सकते, वे उंच-नीच और सच्चा झूठा मुसलमान के नाम पर एक दूसरे का कत्लेआम कर रहे हैं तो दलित मुस्लिम भाई भाई, हिन्दू मुस्लिम भाई भाई कैसे हो सकते हैं जबकि कुरान में तीन तीन जगह मुसलमानों को गैरमुस्लिमों को दोस्त बनाने से मना किया गया है? वे कुरान और हदीस को मानेंगे या भाईचारे को? दलित मुस्लिम भाईचारे के विषय पर हर दलित भाई बहनों को बाबा साहेब आंबेडकर के विचार जरुर जानना चाहिए। दलित मुस्लिम भाई भाई का नारा नया नहीं है। भारत की आजादी की लड़ाई के दौरान मुस्लिम लीग…

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ब्रेस्ट टैक्स
आधुनिक भारत, राष्ट्रीय मुद्दे

ब्रेस्ट टैक्स: एक फर्जी वामपंथी कथा

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महान राष्ट्रवादी इतिहासकार स्वर्गीय पुरुषोत्तम नागेश ओक लिखते हैं कि यूरोपियन जब ईसाई बने तो अपने सभी प्राचीन ऐतिहासिक ग्रंथों को आग लगा दिया और अपने पूर्वजों द्वारा निर्मित पुरातात्विक साक्ष्यों को भी नष्ट कर दिया। उन्होंने अपने पूर्वजों के इतिहास को अंधकार युग कहकर नकार दिया। पीटर, पॉल जैसे कनवर्टेड यूरोपियन ईसाई बनकर प्रत्येक रविवार को प्रार्थना करने के बाद अपने अनुयायियों के साथ हथौड़ा लेकर अपने पूर्वजों के मंदिरों, देवी, देवताओं को तोड़ने और उनके एतिहासिक, वैज्ञानिक और धार्मिक ग्रंथों को जलाने केलिए निकलते थे।  ऐसा शताब्दियों तक चला और उन्होंने वाटिका (अब वेटिकन) मंदिर और उसके ग्रंथालय…

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छद्म धर्मनिरपेक्षवाद
आधुनिक भारत, राष्ट्रीय मुद्दे

छद्म धर्मनिरपेक्षवाद आतंकवाद से ज्यादा खतरनाक है भाग-2

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छद्म धर्मनिरपेक्ष राजनेता, कम्युनिष्ट बुद्धिजीवी और दोगली मीडिया आजकल चिल्ला रहे हैं कि देश में असहिष्णुता बढ़ी है और यह असहिष्णुता भाजपा और मोदी सरकार के आने से बढ़ी है। मेरा मानना है यह असहिष्णुता में वृद्धि नहीं वरन यह दोगली धर्मनिरपेक्षता के विरुद्ध हिंदुओं में असंतोष की वृद्धि है और इस असंतोष में वृद्धि का कारण वर्षों से सेकुलरिज्म के नाम पर ईसाई-मुस्लिम तुष्टिकरण और हिंदुओं का राजनितिक अवहेलना और शोषण, भारत के गौरवशाली सभ्यता, संस्कृति और धर्म का अपमान, राष्ट्र और धर्म की सुरक्षा से खिलवाड तथा तुष्टिकरण केलिए देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा से समझौता आदि…

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