true history of India
गौरवशाली भारत

गौरवशाली भारत-७

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वंदेमातरम् 151.      लेखक Spencer Lewis के ग्रन्थ The mystical Life of jesus के पृष्ठ १३५ पर मुकुटधारी शिशु का एक चित्र मुद्रित है और उसके निचे लिखा है, “Research has revealed that a similar statue of a holy child was exhibited on Chrismas Day in many lands before the Christian era.” 152.      चैत्र से प्रारम्भ होनेवाला मास अरब, यूरोप में एकाम्बर द्वितीयाम्बर आदि संख्यावाची शब्दों में भी गिना जाता था. यूरोपियनों के ईसाई बनने पर नवमास मार्च (जैसे इंग्लैण्ड में २२ मार्च जो १७५२ ईसवी तक चला) को रूढ़ हो गया. उसी मार्च महीने को प्रथम मास मानकर सेप्टेम्बर (सप्तअम्बर),…

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dravidian
नवीनतम शोध, प्राचीन भारत

आर्य-द्रविड़ एक ही मूल और एक ही संस्कृति के लोग है

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आर्य द्रविड़ जन द्रविड़ संस्कृति वैदिक आर्य संस्कृति ही है. द्रविड़ और आर्य दोनों वैदिक लोग ही हैं. एसा इसलिए नहीं कह रहा हैं कि आधुनिक एतिहासिक और वैज्ञानिक शोधों से साबित हो चूका है की आर्य हजारों लाखों वर्षों से भारत के मूलनिवासी रहे हैं या डीएनए शोध से आर्यों और द्रविड़ों के एक ही मूल के होने का पता चला है. या फिर विदेशी इतिहासकार द्रविड़ों को आर्य क्षत्रिय बताते हैं या मनुस्मृति द्रविड़ों को भारत के दस क्षत्रिय वंशों में से एक बताते हैं आदि. मैं एसा इसलिए कह रहा हूँ कि हमारे वामपंथी इतिहासकार जब द्रविड़…

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hindu architecture
गौरवशाली भारत, प्राचीन भारत

वैदिक स्थापत्य ही पूरे विश्व के स्थापत्य कला की जननी है

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वैदिक स्थापत्य कला विश्व में स्थापत्यकला के दर्जनों प्राचीन ग्रन्थ हैं और वे ग्रन्थ सिर्फ संस्कृत में हैं, इसलिए वे वैदिक सभ्यता के धरोहर है. वैदिक स्थापत्य यानि वास्तुकला और नगर-रचना की पूरी विधि मूल तत्व आदि विवरण जिन संस्कृत ग्रंथों में मिलता है उन्हें अगम साहित्य कहा जाता है. ये ग्रन्थ बहुत प्राचीन हैं. मानसार शिल्पशास्त्र के रचयिता महर्षि मानसार के अनुसार ब्रह्मा जी ने नगर-निर्माण और भवन-रचना विद्याओं में चार विद्वानों को प्रशिक्षण दिया. उनके नाम हैं-विश्वकर्मा, मय, तवस्तर और मनु. शिल्पज्ञान (Engineering) की सबसे प्राचीन संस्कृत ग्रन्थ है भृगु शिल्पसन्हिता. किले, महल, स्तम्भ, भवन, प्रासाद, पूल, मन्दिर,…

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ऐतिहासिक कहानियाँ, प्राचीन भारत

भारतवर्ष के नव निर्माता महापराक्रमी पुष्यमित्र शुंग

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महापराक्रमी पुष्यमित्र शुंग जबतक सम्राट अशोक अपने गुरु चाणक्य की नीतियों पर चलता हुआ खड्गहस्त रहा, मौर्य साम्राज्य फलता फूलता रहा और फैलकर पश्चिम में ईरान तो पूर्व में म्यानमार की सीमा को छूने लगा. यह उत्तर में अफगानिस्तान, कश्मीर को सम्मिलित करते हुए दक्षिण में तमिलनाडू और केरल की सीमा तक पहुँच गया था, परन्तु, शस्त्र त्यागकर भेड़ी घोष (युद्ध विजय) के स्थान पर धम्म घोष की नीति अपनाते ही चाणक्य और चन्द्रगुप्त मौर्य के खून पसीने से निर्मित विशाल मौर्य साम्राज्य देखते ही देखते भड़भडाकर गिरने लगा. कहा जाता है उसने अपने सैनिकों को भी निशस्त्र कर बौद्ध…

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hindu-buldings
प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत

भारत की ऐतिहासिक इमारतें हिन्दू, बौद्ध, जैन निर्मित है

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हिन्दू इमारतें भारत के ऐतिहासिक इमारतों को मुस्लिम इमारतें, मस्जिदें, मकबरे आदि होने का झूठ अलेक्जेंडर कनिंघम नाम के लुच्चे अंग्रेज जो दुर्भाग्य से भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग का प्रथम अध्यक्ष था ने जानबूझकर फैलाया था. यहाँ तक की उनके सर्वेक्षकों ने जिन इमारतों को हिन्दू इमारतें पाया उन्हें भी डांटकर चुप करा दिया. जैसे की सर्वेक्षक जोसेफ बैगलर ने कुतुबमीनार और उसके आस पास के इमारतों को हिन्दू इमारतें घोषित किया तो धूर्त कनिंघम ने उसे चुप करा दिया-पी एन ओक कनिंघम के फैलाये उस झूठ को ही मुस्लिमपरस्त, हिन्दूविरोधी वामपंथी इतिहासकार ज्यों के त्यों फ़ैलाने लगे. जब उनसे…

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गौरवशाली भारत-६
गौरवशाली भारत

गौरवशाली भारत-६

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126.      आप-सिन्धु का अपभ्रंश है आबसिन. इसी से अफ्रीका का अबीसीनिया देश का नाम पड़ा है. वहां के मूल निवासी भारत से आकर बसे थे. Eusebius नाम के ग्रीक इतिहासकार ने India as seen and known by Foreigners पुस्तक में लिखा है कि सिन्धु नदी के किनारे रहनेवाले लोग ईजिप्त के समीप इथिओपिया (अबीसीनिया) प्रदेश में आकर बसे. 127.      वैदिक कालगणना के अनुसार साठ पल की एक घटि और साठ घटियों का एक दिन होता है. ढाई घटियों का एक होरा बनता है. उसी होरा शब्द से Hour बना है. 128.      भारतीय पद्धति में समय के मापक इकाई १ परमाणु=…

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गौरवशाली भारत - ५
गौरवशाली भारत

गौरवशाली भारत-५

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101.      यूरोप में सारे ड्रुइडो का धर्मप्रमुख जिसे सामान्यजनों को पापी ठहराकर बहिष्कृत कराने या पापमुक्त घोषित करने का अधिकार था उसके पद का संस्कृत नाम था पाप-ह यानि पापहर्ता या पापहंता. रोम में उसके धर्मपीठ को Vatican संस्कृत शब्द वाटिका कहा जाता था. उसी पाप-ह शब्द से पोप शब्द बना. किन्तु फ्रेंच आदि अन्य यूरोपीय भाषाओँ में उस धर्मगुरु को अभी भी उसके मूल संस्कृत शब्द पाप या पाप-ह ही कहते है.(पी एन ओक) 102.      The Celtic Druids, Writer-Godfrey Higgins, Picadilly, 1929 ग्रन्थ की भूमिका में हिगिंस ने लिखा है, “उत्तर भारत के निवासी बौद्ध लोग, जिन्होंने पिरमिड्स, स्टोनहेंज,…

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old kaba
पौराणिक काल, प्राचीन भारत

काबा शिव मन्दिर था और मुहम्मद का परिवार वहां के पुजारी

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प्राचीन काबा अरब प्राचीनकाल से शिव भक्ति का केंद्र रहा है क्योंकि पौराणिक काल से अरब-अफ्रीका असुरों और दानवों का निवास स्थान (असुर लोक) रहा है. बाद में वे Cushites (कुश के प्रजाजन), Semetic (कृष्ण भक्त) भी बने और भारत के सम्राट विक्रमादित्य और शालिवाहन के समय अर्बस्थान भारत के प्रत्यक्ष नियन्त्रण में था. फिर मौर्य सम्राट अशोक के काल में वहां बौद्ध धर्म भी फला फूला और विकसित हुआ. अतः इस्लाम के पहले अरब के लोग भी हिन्दू ही थे जिन्हें आधुनिक इतिहास में पैगन (मूर्तिपूजक) कहा जाता है और इसलिए मक्का प्रसिद्ध तीर्थस्थल था जहाँ काबा मन्दिर था…

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old mecca
पौराणिक काल, प्राचीन भारत

इस्लामपूर्व अर्बस्थान का हिन्दू इतिहास

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मक्का का पुराना तस्वीर यह ख़ुशी की बात है कि अंग्रेजों और वामपंथियों का हिन्दू विरोधी षड्यंत्र की हम हिन्दू विदेशी और अपने ही देश भारतवर्ष पर आक्रमणकारी है अब झूठ और मनगढ़ंत साबित हो चूका है. अब इतिहासकार मानने लगे हैं कि हिन्दू विदेशों से भारत नहीं आये बल्कि विश्वगुरु भारत के गौरवशाली हिन्दू भारत से निकलकर पुरे विश्व में वैदिक संस्कृति, सभ्यता, धर्म, शिक्षा, ज्ञान, विज्ञान और व्यापार का प्रसार किये थे.आधुनिक इतिहास शोधों से अब स्पष्ट हो गया है कि लगभग पुरे एशिया पर इस्लाम पूर्व काल तक हिन्दुओं का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शासन था. अरब में…

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गौरवशाली भारत - ४
गौरवशाली भारत

गौरवशाली भारत-४

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76.         प्राचीन संस्कृत ग्रन्थ बृहदविमानशास्त्र, गयाचिन्तामणि, भागवतम, शानिस्त्रोत और रामायण में विमानों का उल्लेख है. बंगलोर के इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस के विमान विभाग के पांच रिसर्चरों का शोध पत्र मद्रास से प्रकाशित द हिन्दू पत्रिका में प्रकाशित हुआ था. शोधकों ने लिखा था, “भरद्वाज मुनि द्वारा लिखित बृहदविमानशास्त्र ग्रन्थ में वर्णित विविध विमानों में से ‘रुक्मी’ प्रकार के विमान का वहनतंत्र या उड़ानविधि समझ में आती है. उस विधि द्वारा आज भी विमान की उडान की जा सकती है. किन्तु अन्य विमानों का ब्यौरा समझ नहीं आता. 77.         प्राचीन काल के वैदिक शास्त्रों में ८ प्रकार के उर्जा स्रोत से…

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