गौरवशाली भारत - ४
गौरवशाली भारत

गौरवशाली भारत-४

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76.         प्राचीन संस्कृत ग्रन्थ बृहदविमानशास्त्र, गयाचिन्तामणि, भागवतम, शानिस्त्रोत और रामायण में विमानों का उल्लेख है. बंगलोर के इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस के विमान विभाग के पांच रिसर्चरों का शोध पत्र मद्रास से प्रकाशित द हिन्दू पत्रिका में प्रकाशित हुआ था. शोधकों ने लिखा था, “भरद्वाज मुनि द्वारा लिखित बृहदविमानशास्त्र ग्रन्थ में वर्णित विविध विमानों में से ‘रुक्मी’ प्रकार के विमान का वहनतंत्र या उड़ानविधि समझ में आती है. उस विधि द्वारा आज भी विमान की उडान की जा सकती है. किन्तु अन्य विमानों का ब्यौरा समझ नहीं आता. 77.         प्राचीन काल के वैदिक शास्त्रों में ८ प्रकार के उर्जा स्रोत से…

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गौरवशाली भारत
गौरवशाली भारत

गौरवशाली भारत-३

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51.         यहूदी, ईसाई और इस्लामी पंथ में जिस मूल धर्मप्रवर्तक अब्राहम का उल्लेख हुआ है, वे ब्रह्मा ही हैं. ब्रह्मा को अब्रम्हा कहना वैसी ही उच्चारण विकृति है जैसे स्कूल को अस्कूल और स्टेशन को अस्टेशन कहने में होती है. मुसलमानों में वही वैदिक ब्रह्मा अब्राहम के बजाए इब्राहीम उच्चारा जाता है-पी एन ओक 52.         ईश्वर का संस्कृत शब्द इशस बाइबिल में Jesus, यहूदी में issac (इशस) जबतक c का उच्चारण स होता रहा तब तक इशस; c का उच्चारण क होने पर आयझेक, इस्लाम में इशाक (issac अर्थात इशस) कहलाता है. अतः स्पष्ट है सारे विश्व में प्राचीन काल…

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Bharat mata-2
गौरवशाली भारत

गौरवशाली भारत-२

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26.         चतुर्युग अर्थात सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग कुल ४३२०००० वर्षों का होता है जिसे एक चक्र कहते हैं. १००० चक्र अर्थात ४३२००००००० वर्ष को एक कल्प कहते हैं जो बिगबैंग सिद्धांत के अनुरूप सृष्टि निर्माण काल और विरामकाल के अनुरूप है. एक कल्प में १४ मन्वन्तर होते हैं. प्रत्येक मन्वन्तर के शासक को मनु कहते हैं. वर्तमान मनुस्मृति चालू मन्वन्तर की आचारसंहिता है. वर्तमान विश्व सातवें मन्वन्तर में है जो सौर्यमंडल सिद्धांत और सूर्य के वैज्ञानिक आयु के समकक्ष है. 27.         ईश्वरः सर्व भूतेषु हृदेशे अर्जुन तिष्ठति भ्राम्यन सर्वभूतानि यंत्ररुढ़ानि मायया. अर्थात समूचा विश्व एक यंत्र है जिस पर…

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aryans
पौराणिक काल, प्राचीन भारत

वैदिक आर्य बाहर से भारत नहीं आये बल्कि भारत से बाहर विभिन्न क्षेत्रों में गये थे!

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इस तस्वीर को ध्यान से देखिए. आउट ऑफ़ अफ्रीका सिद्धांत वस्तुतः आउट ऑफ़ इंडिया सिद्धांत ही है. पूरा विश्व अब मानने लगा है कि विश्व की प्राचीन सभ्यता वास्तव में भारत से ही पूरी दुनिया में फैली. पर दुर्भाग्य की बात यह है कि भारत के कांग्रेसी सरकार और वामपंथी इतिहासकार भारत में सत्य के विपरीत ठीक उल्टा सिद्धांत बना रखें हैं. जब भारत की सरकार और शिक्षा तन्त्र ही झूठ का लबादा ओढ़ रखा हो तो फिर दुसरे देश क्या करें? इसलिए इतिहास के अन्वेषक पूरे विश्व के विद्वान किंकर्तव्यविमूढ़ हो आउट ऑफ़ अफ्रीका सिद्धांत की ओर देखते हैं…

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आर्य जन
प्राचीन भारत

आर्य जन आक्रमणकारी थे या आक्रमित?

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वैदिक ऋषि गण यह सिद्ध करने के बाद की आर्यों के आक्रमण का सिद्धांत महज साम्राज्यवादी षड्यंत्र था आज हम इस प्रश्न पर विचार करेंगे की क्या हम भारतीयों के पूर्वज आर्य जन सचमुच असभ्य, बर्बर, खानाबदोश, हिंसक, लूटेरा और आक्रमणकारी थे? आज हम धूर्त नेहरूवादी वामपंथी इतिहासकारों के एक और झूठ का पर्दाफाश करेंगे. क्या असुर, दानव, दैत्य, राक्षस बेचारे लोग थे? कभी आपने पढ़ा या सुना है की देवताओं ने असुर लोक/दानव लोक पर आक्रमण कर दिया और उसपर अधिकार कर लिया? अलवत्ता आप हर जगह यही पढते और सुनते हैं की असुरों/दानवों ने देव लोक पर आक्रमण…

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आर्य
प्राचीन भारत

भारत पर आर्यों के आक्रमण का सिद्धांत ब्रिटिश साम्राज्यवादी षड्यंत्र था

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आर्यों के आक्रमण का सिद्धांत भारत में ब्रिटिश शासन का एक साम्राज्यवादी षड्यंत्र था. “आर्य जाति” का अविष्कार १८५० के दशक में एक फ्रेंच जोसेफ आर्थर डे ने किया था जिसे भारत में ज्यों का त्यों अंग्रेज सैनिक कनिंघम ने अपना लिया जो भारतीय पुरातत्व विभाग का प्रथम अध्यक्ष था. उसके पहले भारतवर्ष के इतिहास, पुराण और वेदों में कहीं भी आर्य जाति का कोई उल्लेख नहीं है क्योंकि आर्य “जाति” जैसा कोई चीज था ही नहीं. आर्य शब्द वास्तव में जाति सूचक नहीं “श्रेष्ठता” सूचक था “सम्मान” सूचक था और भारतवर्ष के लोग सम्मान देने के लिए आर्य शब्द…

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anti india
आधुनिक भारत, पौराणिक काल, प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत

भारत का इतिहास भारत विरोधी क्यों?

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भारत विरोधी इतिहास और इतिहासकार ईसाई, इस्लामी और वामपंथी तीनों इतिहास के दुश्मन होते हैं. ये तीनों अपने अतीत के इतिहास को निकम्मा और गैरजरूरी बताकर नष्ट कर देते हैं. अगर भारत में घर घर में रामायण, महाभारत, वेद, पुराण आदि नहीं होते तो ये तीनों मिलकर भारत के गौरवशाली अतीत को भी नष्ट करने में सफल हो गये होते-स्वर्गीय पुरुषोत्तम नागेश ओक, महान राष्ट्रवादी इतिहासकार विचार कीजिए… आपने किसी देश का ऐसा इतिहास पढ़ा है जो अपने ही देश और उसके मूलनिवासियों के अतीत को कलंकित करती हो? कभी आपने सोचा है विश्व की सबसे प्राचीन और गौरवशाली सभ्यता,…

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Bharat Mata-1
गौरवशाली भारत

गौरवशाली भारत-१

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1.            भा-रत यानि सूर्य की दैवी आभा के ध्यान में रत रहने वाला देश. वैदिक सम्राट भरत प्रलय के पश्चात विश्व के सम्राट हुए तब से सारे विश्व का भारतवर्ष नाम पड़ा. “वर्ष” शब्द पूरी गोल पृथ्वी का निदर्शक है. आंग्ल शब्द युनिवर्ष (Universe) में भी वही संस्कृत शब्द उसी अर्थ से रूढ़ है. बारह मासों का एक वर्ष जब कहा जाता है तो वहां भी “वर्ष” शब्द गोल ऋतुचक्र का द्योतक है-पी.एन.ओक २.     भारतियों को अरब लेखक हिन्दू कहा करते थे क्योंकि उस समय भारत निवासी सारे हिन्दू होते थे. फ्रेंच लोग भी भारतियों को हिन्दू ही कहते हैं-पी…

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