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आधुनिक भारत, नवीनतम शोध

अशोक और अकबर महान, चन्द्रगुप्त मौर्य और विक्रमादित्य क्यों नहीं?

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महान कौन? भारतवर्ष के ऐतिहासिक काल (जिसका लिखित और पुरातात्विक साक्ष्य दोनों उपलब्ध हो) में ही दर्जनों ऐसे पराक्रमी, महापराक्रमी और महान राजा, सम्राट भरे हुए हैं जो अशोक मौर्य से लाख गुना बेहतर थे और बेहतर हुए. पूरे भारतवर्ष को फिर से एकसूत्र में बांधनेवाला अपने दादा चन्द्रगुप्त मौर्य के सामने ही अशोक मौर्य कहीं नहीं ठहरता है, सम्राट विक्रमादित्य की तो वह परछाई भी नहीं छू सका. इन दोनों की महानता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग आधे दर्जन परवर्ती राजाओं ने चन्द्रगुप्त की उपाधि धारण की थी और दर्जनों राजाओं ने विक्रमादित्य…

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आधुनिक भारत, नवीनतम शोध

नेहरु हिंदू थे या मुस्लिम: एक खोज, भाग-२

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मैमूना बेगम उर्फ़ इंदिरा गाँधी और फिरोज खान उर्फ़ फिरोज गाँधी गतांक से आगे… ६.     जिन्ना और मुस्लिम लीग ने १९४६ में जब हिंदुओं के विरुद्ध प्रत्यक्ष कार्यवाही की घोषण की और हिंदुओं की हत्या, लूट और हिंदू स्त्रियों के बलात्कार होने लगे उस समय नेहरु भारत के अंतरिम प्रधानमंत्री थे, पर उन्होंने इसे रोकने का कोई प्रयत्न नही किया. परन्तु बिहार में जैसे ही कोलकाता में मारे गए लोगों के परिजनों ने इसके विरोध में प्रतिक्रिया व्यक्त की इन्होने तत्काल सेना भेजकर उन्हें गोलियों से भुनवा दिया और उन्हें मरवाने के बाद उसने कहा अब दिल को तसल्ली मिली…

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आधुनिक भारत, नवीनतम शोध

नेहरु हिंदू थे या मुस्लिम: एक खोज, भाग-१

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उपर बाएं गंगाधर नेहरु, फोटो साभार आनंद भवन (नये तथ्यों के आधार पर संशोधित) लोग अक्सर प्रश्न पूछते हैं कि ईसाई माँ और मुसलमान (या पारसी) बाप का बेटा राहुल गाँधी जैसे खुद को दत्तात्रेय गोत्र का जनेऊधारी ब्राह्मण बताता है, कहीं पंडित जवाहरलाल नेहरु भी, वैसे ही फर्जी पंडित तो नहीं थे? जवाहरलाल नेहरु के हिन्दू विरोधी, हिन्दू धर्म विरोधी और भारत विरोधी कुकृत्यों की लम्बी श्रृंखला देखकर मेरे दिमाग में भी अक्सर यही प्रश्न उठता था. इसलिए मैंने सत्य का पता लगाने का निश्चय किया. ज्ञातव्य है कि अपने मुस्लिमपरस्त मानसकिता और कार्यों की वजह से पंडित नेहरु…

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bappa rawal
ऐतिहासिक कहानियाँ, मध्यकालीन भारत

भारत की शान परमशक्तिशाली रघुवंशी राजा बाप्पा रावल

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बाप्पा रावल एक बालक की गाय रोज दूध दुहने के समय कहीं चली जाती थी. उस बालक को अक्सर भूखा रहना पड़ता था, इसलिए एक दिन वो गाय के पीछे पीछे गया और देखा गाय एक ऋषि के आश्रम में जाकर एक शिवलिंग पर अपने दूध से अभिषेक करने लगी. बालक अचम्भित देख ही रहा था कि तभी उसने देखा उसके पीछे एक ऋषि खड़े मुस्कुरा रहे हैं. उस ऋषि का नाम था “हारीत ऋषि” और वह बालक बाप्पा रावल के नाम से विख्यात हुआ. हारीत ऋषि ने ही उस बालक को शिक्षा दीक्षा दी और उनके सहयोग से ही…

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प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत

कुतुबमीनार नहीं विष्णु स्तम्भ कहिये, ये रहा प्रमाण

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विष्णु स्तम्भ, महरौली, दिल्ली कुतुबमीनार का वास्तविक नाम विष्णु स्तंभ है जिसे आक्रमणकारी कुतुबुद्दीन ने नहीं बल्कि सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के नवरत्नों में से एक और खगोलशास्त्री वराहमिहिर ने बनवाया था. विष्णु स्तम्भ के पास जो बस्ती है उसे महरौली कहा जाता है. यह एक संस्कृ‍त शब्द है जो मिहिर शब्द से बना है और यह खगोलशास्त्री वराहमिहिर के नाम पर ही बसा है जहाँ वे रहते थे. उनके साथ उनके सहायक, गणितज्ञ और तकनीकविद भी रहते थे और इस विष्णु स्तम्भ का उपयोग खगोलीय गणना, अध्ययन के लिए करते थे. इस स्तम्भ के चारों ओर हिंदू राशि चक्र को…

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गौरवशाली भारत, प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत

प्राचीन भारत के १५ विश्वविद्यालय जिसके कारण भारत विश्वगुरु कहलाता था

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भारतवर्ष के विश्वविद्यालय भारत के इतिहास्यकार और तथाकथित बुद्धिजीवी हमें समझाते हैं कि क्षत्रिय और ब्राह्मण खुद पढ़ता लिखता था पर तुमलोगों को शिक्षा नहीं देता था क्योंकि तुमलोग शूद्र हो. संस्कृत सवर्णों कि भाषा थी, ब्राह्मण तुम्हे संस्कृत नहीं पढने देते थे. क्या सचमुच ऐसा था? आइये पता करते हैं. तक्षशिला विश्वविद्यालय में पूरे विश्व के लोग शिक्षा ग्रहण करने आते थे और चन्द्रगुप्त मौर्य भी वहीँ का विद्यार्थी था. पर उपर्युक्त लोग तो चन्द्रगुप्त मौर्य को क्षत्रिय नहीं मानते हैं? नालंदा और बिक्रमशिला विश्वविद्यालयों में भी पूरे विश्व के लोग शिक्षा ग्रहण करने आते थे. क्या वे क्षत्रिय…

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मध्यकालीन भारत

हिन्दू मन्दिर और भवन जो अब मुस्लिम इमारतें कहलाती है

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हिन्दू इमारतें मुझे महान राष्ट्रवादी इतिहासकार स्वर्गीय पुरुषोत्तम नागेश ओक से पत्राचार का अवसर प्राप्त हुआ था. मैं जब मुंबई में था तो उनके भारतीय इतिहास शोध संस्थान का सदस्य भी रहा हूँ. बाबरी मस्जिद तोड़े जाने पर जब मैंने उनसे पूछा था कि आपकी क्या राय है तो उन्होंने ॐ को ७८६ को उल्टा लिखकर समझाते हुए कहा था कि आक्रमणकारी कभी निर्माता नहीं थे. वे हिन्दू इमारतों का केवल स्वरूप चेंज कर देते थे जैसे उन्होंने ॐ को ७८६ (अरबी में उल्टा लिखा जाता है) कर दिया था. उन्होंने कहा था जिस ढांचे को तोड़ा गया वो वास्तव…

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गौरवशाली भारत, प्राचीन भारत

वैदिक स्थापत्य ही पूरे विश्व के स्थापत्य कला की जननी है

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वैदिक स्थापत्य कला विश्व में स्थापत्यकला के दर्जनों प्राचीन ग्रन्थ हैं और वे ग्रन्थ सिर्फ संस्कृत में हैं, इसलिए वे वैदिक सभ्यता के धरोहर है. वैदिक स्थापत्य यानि वास्तुकला और नगर-रचना की पूरी विधि मूल तत्व आदि विवरण जिन संस्कृत ग्रंथों में मिलता है उन्हें अगम साहित्य कहा जाता है. ये ग्रन्थ बहुत प्राचीन हैं. मानसार शिल्पशास्त्र के रचयिता महर्षि मानसार के अनुसार ब्रह्मा जी ने नगर-निर्माण और भवन-रचना विद्याओं में चार विद्वानों को प्रशिक्षण दिया. उनके नाम हैं-विश्वकर्मा, मय, तवस्तर और मनु. शिल्पज्ञान (Engineering) की सबसे प्राचीन संस्कृत ग्रन्थ है भृगु शिल्पसन्हिता. किले, महल, स्तम्भ, भवन, प्रासाद, पूल, मन्दिर,…

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ऐतिहासिक कहानियाँ, मध्यकालीन भारत

दुश्मनों का काल रघुवंशी राजा मिहिर भोज प्रतिहार

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सम्राट महिर भोज प्रतिहार वीरों और योद्धाओं की जाति गुर्जर प्रतिहार रघुवंश शिरोमणि श्रीराम के अनुज लक्ष्मण के वंशज हैं. इस वंश में एक से एक महाभट योद्धा और पराक्रमी शासक हुए जिसकी जितनी चर्चा और प्रशंसा की जाये कम है. इसी गौरवशाली वंश में सम्राट मिहिर भोज का जन्म हुआ था. उन्होंने ८३६ ईस्वी से ८८५ ईस्वी तक कभी कन्नौज तो कभी उज्जैन से शासन किया. भले ही वामपंथी इतिहासकारों ने मिहिर भोज के इतिहास को काट देने की साजिश की है, मिहिर भोज क्या उन सभी महान भारतीय सम्राटों और योद्धाओं को भारतीय इतिहास से गायब कर दिया…

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Bakhtiyar Khilji
ऐतिहासिक कहानियाँ, मध्यकालीन भारत

बिहार, बंगाल का विनाशक बख्तियार खिलजी को असम के वीरों ने दौड़ा दौड़ा कर मारा

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बख्तियार खिलजी मोहम्मद बख्तियार खिलजी गर्मसिर प्रान्त के गोर स्थान का जन्मजात लूटेरा था. अपनी लूटेरी प्रवृति के कारन वह लूटेरों के सरदार मोहम्मद गोरी के दल में शामिल हो गया और लूटपाट में अधिक से अधिक हिस्सेदारी पाने और बड़े ओहदे केलिए मोहम्मद गोरी के काम पिपासा शांत करने हेतु औरतों की दलाली करने लगा. वह हिन्दुओं, बौद्धों, जैनों को लूटने, कत्ल करने के साथ साथ उनकी स्त्रियों, बहनों और बेटियों को सेक्स गुलाम बनाकर बेचने का धंधा भी करने लगा. शैतान बख्तियार खिलजी की पैशाचिक प्रतिभा को देखते हुए मुहम्मद गोरी के अवध का सिपहसालार मलिक हिसामुद्दीन ने…

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