आधुनिक भारत

हिन्दुओं के विरुद्ध सेकुलरिज्म का षड्यंत्र

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तथाकथित सेकुलर राजनेता, कम्युनिष्ट बुद्धिजीवी और दोगली मीडिया चिल्लाते हैं देश में असहिष्णुता बढ़ रही है और यह असहिष्णुता भाजपा और मोदी सरकार के आने से बढ़ी है. मेरा मानना है यह असहिष्णुता में वृद्धि नहीं वरन यह असंतोष में वृद्धि है और इस असंतोष में वृद्धि का कारण वर्षों से सेकुलरिज्म के नाम पर ईसाई-मुस्लिम तुष्टिकरण और हिंदुओं का राजनितिक अवहेलना, भारत के गौरवशाली सभ्यता, संस्कृति और धर्म का अपमान, राष्ट्र और धर्म की सुरक्षा से खिलवाड तथा तुष्टिकरण केलिए देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा से समझौता आदि कारणों के विरुद्ध हिंदुओं का उद्वेग, असंतोष, गुस्सा, धैर्य, सहिष्णुता आदि का प्रस्फुटन है.

वास्तव में २०१४ में केंद्र में सत्ता परिवर्तन भी दोगली सेकुलरिज्म से उत्पन्न इसी असंतोष का परिणाम था जो आज खुलकर अभिव्यक्त हो रहा है और मैं दावा करता हूँ यह असंतोष का प्रदर्शन मात्र नहीं बल्कि यह सेकुलरिज्म के षड्यंत्र के विरुद्ध जनजागृति, राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्र जागरण का शंखनाद है जो सिर्फ इस देश की सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि हिन्दुस्तान की खोई हुई आत्म-गौरव, प्रतिष्ठा, शक्ति, समृद्धि और सुरक्षा के सुफल परिणामों को लाकर ही अब संतुष्ट होगा.

स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में अपवाद को छोड़कर मुसलमानों ने पाकिस्तान की लड़ाई लड़ी तो ईसाईयों ने अपने अंग्रेज आका के शासन के विरुद्ध तटस्थ रहना ही उचित समझा. धर्म के आधार पर भारत का विभाजन करवाने के बाबजूद मुस्लिम इतिहास की घृणित और नृशंस सच्चाई को दरकिनार कर गैर मुस्लिमों के बजूद को अस्वीकार करनेवाले मुसलमानों का भारत में हिंदुओं की छाती पर मुंग दलने केलिए रहने दिया गया जिसका शिकार हिन्दुस्तान के हिंदू तो बाद में परन्तु पाकिस्तान और बंगलादेश के हिंदू तत्काल हुए और वे अब पाकिस्तान में सिर्फ २% और बंगलादेश में सिर्फ ७%  बचे हैं. वे जी नहीं रहे हैं बल्कि अपने मौत का इंतजार कर रहे हैं.

सर्वधर्म समभाव और वसुधैव कुटुम्बकम की उद्दात विचारधारा वाले हम हिंदू हिन्दुस्तान की इस नियति को भी स्वीकार कर लेते और आज भी स्वीकारने को तैयार हैं परन्तु इसके बाद सेकुलरिज्म के नाम पर तुष्टिकरण का राष्ट्र विरोधी, हिंदू विरोधी जो नंगा नाच हुआ और हो रहा है वह न केवल हिंदुओं के अपने ही घर में दुर्दशा केलिए जिम्मेदार है बल्कि यह राष्ट्र केलिए भी बहुत ही खतरनाक और षड्यंत्र से कम नहीं हैं. मैं एक झलक दिखाता हूँ की आज का असंतोष हिन्दुस्तान की किस दुर्दशा का परिणाम है:

1.            ईसाई-मुस्लिम तुष्टिकरण के तहत भारत के गौरवशाली इतिहास को मिटा दिया गया या फिर उसे कलंकित कर पेश किया गया. हम हिंदुओं को भी ईसाई और मुसलमानों की तरह अपने ही देश में आक्रमणकारी और सिर्फ १५०० ईस्वी पूर्व आये घोषित कर दिया. इतना ही नहीं, मध्यकालीन मुस्लिम आक्रमणकारियों को हीरो और उससे अपने राष्ट्र, धर्म, जान और अस्मत की सुरक्षा केलिए लड़ने वाले हिंदू वीरों को विलेन के रूप में दिखाया गया. यही नहीं, आतंकवादी, दंगाई, बलात्कारी, हिंसक मुसलमानों को जबरन महान सिद्ध करने केलिए उनकी एकाध अच्छी बातों को बढ़ा चढाकर और हिंदुओं की एकाध खामियों को तिल का तार बनाकर पेश किया गया.

२.     मुस्लिम तुष्टिकरण केलिए नेहरु ने भारत का मस्तक, स्वर्ग और मुख्य धार्मिक एतिहासिक क्षेत्र कश्मीर को भारत का सिरदर्द और आतंकवाद का अड्डा बनने केलिए मजबूर किया. कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान को दे दिया दूसरा चीन को और बचे हिस्से को निपटाने केलिए काला कानून के नाम से कुख्यात धारा-३७० दे दिया.

३.     हिन्दुस्तान के आजाद होने के बाबजूद मुस्लिम तुष्टिकरण केलिए मुस्लिम काल में अधिगृहित हिंदुओं के मंदिरों, पाठशालाओं और एतिहासिक इमारतों का उद्धार नहीं किया गया और हिंदुओं का धार्मिक-सांस्कृतिक-एतिहासिक स्थल अयोध्या, मथुरा, काशी आदि के मंदिर आज भी मुसलमानों के कब्जे में है.

४.     इंदिरा सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर हिंदुओं का पकड़ पकड़ कर बंध्याकरण किया

५.     मुसलमानों के भारत में रह जाने के कारण विभाजित भारत अविभाजित भारत की तरह ही अनवरत दंगा, हिंसा, आतंकवाद, बलात्कार, भुखमरी, गरीबी, बेरोजगारी आदि का शिकार है. उस पर कांग्रेसी प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने बेशर्मी से इस देश के संसाधनों पर मुस्लिमों का पहला हक बताया जो उनकी घृणित सांप्रदायिक राजनीती को उजागर करता है जिसका एकमात्र उद्देश्य मुस्लिम वोट बैंक मजबूत करना था, परन्तु यह देश की सांप्रदायिक सौहार्द के लिए घातक साबित हुआ. प्रधान मंत्री भूल गए की इस देश में ८०% हिंदू मूलनिवासी रहते है. समानता के अधीन प्रजातान्त्रिक भारत में किसी भी समुदाय का पहला या दूसरा हक नहीं हो सकता, ये मामूली बात भी देश के सर्वोच्च पद पर आसीन मनमोहन सिंह भूल गए. उनके इस वक्तव्य ने राष्ट्रवादी हिंदुओं के दिल को चोट पहुंचाई तो कट्टर मुस्लिमों, देशद्रोहियों और आतंकवादिओं के मनोबल को बढ़ाया है.

२.     कांग्रेस सरकार का घिनौना सांप्रदायिक चेहरा जम्मू-कश्मीर के मामले में उजागर हुआ जहाँ इसने देश की सुरक्षा को ताक पर रखकर कई ऐसे निर्णय लिए है जो घातक है.

क.    इस सरकार ने मारे गए आतंकवादियों के परिवार के लिए पेंशन योजना शुरू की.

ख.    इस सरकार ने पाकिस्तान में आतंकवाद का ट्रेनिंग ले रहे आतंकवादिओं को आदर सहित प्रवेश का मार्ग और देश में रहने की व्यवस्था का निर्णय लिया ताकि वे आसानी से जेहाद का उद्देश्य पूरा कर पुण्य कमाए. ऐसे आतंकवादियों को पुलिस भी बनाया गया जो हथियार लेकर फिर आतंकवादी बन गए जिनमे कुछ ही आतंकवादी मारे गए.

७.     सोनिया गाँधी के नेतृत्व में “प्रिवेंशन ऑफ कम्युनल एंड टारगेटेड वायलेंस बिल-२०११” बनाया गया. जिस प्रकार पाकिस्तान की इश निंदा कानून के तहत वहाँ अल्संख्यकों की हालत कुत्तों  जैसी बना दी गयी है, वही षड्यंत्र यहाँ हिन्दुओ के विरुद्ध थी. इस कानून के तहत सिर्फ अल्पसंख्यकों के जान माल की क्षति को सांप्रदायिक हिंसा माना गया. अगर हिंदुओं को अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा जान-माल को क्षति पहुंचाई जाती तो उसे सांप्रदायिक नहीं माना जाता. कोई हिंदू मर जाता, घायल होता, उसकी सम्पत्ति नष्ट हो जाती, वह अपमानित होता तो यह कानून उसे पीड़ित नहीं मानता. अगर हिंदू महिला किसी अल्पसंख्यक की हवस का शिकार होती तो वह कानून उसे बलात्कार नहीं मानता. परन्तु हिंदुओं द्वारा अल्पसंख्यकों पर बलात्कार की स्थिति में उसे लैंगिक अपराध का दोषी माना जाता और पूरा हिंदू समाज गुनाहगार माना जाता. अल्पसंख्यकों के साथ घटी घटना की जानकारी रखनेवाला ही गवाह होता. बहुसंख्यकों के सम्बन्ध में जानकारी रखनेवाला गवाह नहीं माना जाता. इनकी धर्मनिरपेक्षता को उजागर करने के लिए ये झलक पर्याप्त है

८.     मुस्लिम वोट बैंक के लिए असंवैधानिक धर्म पर आधारित आरक्षण, पेंशन, वजीफा, नौकरी, ऋण आदि लागु किया गया. सपा सरकार ने तो स्पष्ट कहा की सिर्फ मुस्लिम लड़कियां ही हमारी बेटी है और सिर्फ उसके केलिए आर्थिक सहायता दी जा रही है.

९.    आतंकी शोहराबुद्दीन, इशरत, बटला कांड के मुस्लिम आतंकवादी आदि पर घृणित राजनीती कर मुस्लिमों को हिंदुओं और हिन्दुस्तान के विरुद्ध उभारा गया.

१०.    २००२ के दंगे के लिए चीखना चिल्लाना परन्तु दंगे का कारण गोधरा कांड पर चुप्पी साध लेना. कांग्रेस शासन में हुए हजारों दंगों पर खतरनाक सेकुलर मौन सहिष्णु हिंदुओं की बांध तोड़ने लगी. इसी प्रकार एक तथाकथित मस्जिद के टूटने पर राष्ट्रीय अन्तराष्ट्रीय हंगामा हुआ परन्तु कश्मीर में आजादी के बाद अबतक ३५० से अधिक मंदिरों को नष्ट कर दिया गया जिसपर सेकुलर ख़ामोशी बरकरार है. यही कारण है की मुसलमान आये दिन हिंदुओं के मंदिरों पर बेख़ौफ़ हमला करते हैं क्योंकि यहाँ सेकुलर चर्च और मस्जिद में ढेला फेंकने पर तो शोर मचाते हैं परन्तु मंदिर पर हमला करने पर सेकुलर मौन साध लेते हैं.

११.    अफजल और कसाब की फांसी पर अनावश्यक देरी और राजनीती ने हिंदुओं के असंतोष में वृद्धि किया

१२.    जहाँ एक ओर देश और देश की जनता पाक प्रायोजित आतंकवाद, घरेलु आतंकवाद, स्लीपर सेल आदि से तबाह हो रही थी वहीँ इस देश में आतंकवाद से पीड़ित हिंदुओं को ही षड्यंत्र कर दोषी ठहराया गया, मुस्लिमों की तुष्टि केलिए मुस्लिम आतंकवाद के समकक्ष हिंदू आतंकवाद का भ्रम खड़ा करने का कुत्सित प्रयास किया गया. कुछ देशद्रोही कांग्रेसियों ने तो २६/११ को मुंबई पर हमले के लिए राष्ट्रिय स्वयम सेवक संघ को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराकर और एक आतंकवादी द्वारा इसी आशय पर लिखी पुस्तक का विमोचन कर आतंकवादियों और पाकिस्तान का हौसला बढ़ाया.

१३.    केंद्रीय गृहमंत्री चिदमबरम ने भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का प्रतीक भगवा रंग को आतंकवाद का प्रतीक बताकर मुस्लिम कट्टरवादियों और पाक समर्थक देशद्रोहियों का दिल जीत लिया. चिदंबरम भूल गए की यह भगवा संस्कृति ही है जिसने कई संस्कृतियों को अपने गोद में जगह दी है और समानता तथा भाईचारे के साथ आज भी बिना किसी अपवाद के सहस्तित्व में है. यह भगवा रंग की अतिसहिष्णुता ही है की अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बंगलादेश, कश्मीर और भारत के कई हिस्सों में इसने अपना सनातन भगवा रंग त्यागकर हरा रंग धारण कर लिया है. यदि फिर भी इसे इस तरह अपमानित और बदनाम होना परे तो मै कहूँगा की इसे इतना पक्का हो जाना चाहिए की इसे दूसरे रंग में समाहित हो जाने की बजाय अन्य रंगों को खुद में समाहित कर ले या फिर सामने आनेवाले दूसरे रंगों को प्रभावशून्य कर दे.

१३.    हैदरबाद के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा की अगर सरकार पुलिस को हटा दे तो वो 25 करोड़ मुस्लिम बाकि 100 करोड़ हिन्दुओ को 15 मिनट में मार डाले. पिछले एक हजार वर्षों में जितने हिंदू मारे गए हैं उससे ज्यादा हिंदू मारेंगे. इतना ही नहीं इसने श्री राम और कौशल्या के लिए गंदे अल्फाजों का प्रयोग किया. इसके पहले ओबैसी ने भरी संसद मे गृहमंत्री और प्रधानमंत्री, सोनिया और राहुल की उपस्थिति मे कहा था कि अगर दो महीनों के भीतर आसाम मे मुसलमानों का पुनर्वास नही हुआ तो देश के मुसलमान भारत की ईंट से ईंट बजा देंगे.  इसके बाबजूद धर्मनिरपेक्ष मीडिया और देशद्रोही धर्मनिरपेक्ष नेता और सरकार मौन धारण किये हुए थे.

१४.    जामा मस्जिद का इमाम कई बार देशद्रोही गतिविधियों में लिप्त पाया गाया और उसने खुद को खुलेआम आई एस आई का एजेंट बताया. अबतक १०० से भी ज्यादा बार उसके गिरफ्तारी का वेलेवल और नॉन वेलेवल वारंट जारी हो चूका है पर हाईकोर्ट के कई बार फटकार के बाबजूद कांग्रेस की सरकार उसे गिरफतार करने की हिम्मत नही जुटा सकी जबकि निर्दोष शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को गिरफ्तार करने में इसने कोई देर नहीं लगायी.

१५.    बाबा रामदेव ने जब रामलीला मैदान में कालेधन के विरोध में धरना प्रदर्शन किया तो कांग्रेस की सरकार और दिल्ली पुलिस ने रात्रि में सोते हुए लोगों पर लाठी चार्ज कर उन्हें जबरन भगा दिया जबकि कश्मीर के आतंकवादी सैय्यद अली शाह गिलानी ने देश के अन्य आतंकवादी संगठनो के साथ दिल्ली में सम्मेलन किया, भारत के विरुद्ध नारे लगाये, आतंकवादी संगठनों को भारत सरकार के विरुद्ध एक होने का आवाहन किया, भारतियों के प्यारा तिरंगा को जलाया उस सम्मेलन को कांग्रेसी पुलिस ने संरक्षन प्रदान किया.

१६.    क्रूक मीडिया जब गुलबर्ग सोसाइटी दंगे की बात करती थी तो वो यह नही बताती की इस दंगे की शुरुआत कांग्रेसी सांसद एहसान जाफरी ने हिंदुओं पर गोली चलाकर की थी जिसके बाद दंगे भडके थे. ठीक वैसे ही जैसे गुजरात दंगे चिल्लाने वाली क्रूक मीडिया यह नही बताती की गोधरा में कार सेवकों पर पहले तो पत्थर बरसाए गए और जब वे उससे बचने के लिए खिडकी दरवाजे बंद कर लिए तो चारों ओर पेट्रोल छिड़क आग लगा दिया जिसमे ५९ कारसेवक, औरत और बच्चे जल मरे. क्या हिंदुओं के जान की कीमत नही होती?    

१७.    अयोध्या में तथाकथित मस्जिद टुटा ये विश्व जाना पर कश्मीर में आजादी के बाद २७० मंदिर ढहा गया; हाल में एक शिव मंदिर जला दिया गया और कुछ दिन बाद दूसरा मंदिर भी तोडा गया पर न तो मीडिया में खबर आई और न ही तथाकथित धर्मनिरपेक्षों के कान पर जूं रेंगा. इससे भी शर्मनाक यह है की अखिलेश यादव की सरकार में बरेली, मेरठ आदि सहित १०१ जगहों पर दंगे हुए जिसमें हिंदुओं पर अत्याचार हुआ, हिंदुओं को बुरी तरह मारा गया, हिंदू स्त्रियों के साथ खुलेआम बदसलूकी की गयी, हिंदुओं की दुकाने जला दी गयी और लूट ली गयी पर ये घटनाएँ मीडिया में नहीं आ सकी. आया भी तो केवल मुजफ्फरनगर दंगा वो भी हिंदुओं और भाजपा को बदनाम करने केलिए.

१८.    मुंबई में बांग्लादेशी घुसपैठिये के समर्थन में रजा अकादमी के नेतृत्व में संगठित तरीके से दंगे किये गए और उसे पर्याप्त पुलिस सुरक्षा प्रदान की गयी थी, परन्तु जब वे दंगे करने लगे तो यही भारतीय धर्मनिरपेक्ष पुलिस जो शंतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करनेवाले हिंदुओं पर लाठियां भांजते नही थकती चुपचाप उनसे पिटती रही जिसमे ५० से उपर पुलिसवाले जख्मी हुए और कई तो मर भी गए. क्या उन दंगाइयों को दंगे करवाने की वैध छूट पूर्व प्राप्त थी? अगर नही तो फिर शहीदों का अपमान करनेवाले, पुलिस कर्मियों को मारने बदसुलूकी करने और जान से मारनेवाले उसके आयोजकों को सजा आजतक क्यों नही हुई?

१९.    कांग्रेस की सरकार ने मुंबई दंगे के बाद सिर्फ हिंदुओं के कई वेबसाइट बंद करवा दिए .

२०.    पाकिस्तान में हजारों मदरसे इस कारन से बंद कर दिए गए क्योंकि उसमे कट्टरवाद की तथा धर्म के साथ साथ बन्दुक की शिक्षा भी दी जा रही थी, परन्तु भारत में मदरसा को बढ़ावा दिया जा रहा है और इसके दुष्प्रभाव की व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है. मुस्लिमों के पिछडापन और उनमे अराष्ट्रवादी तत्वों के उद्भव का बीज इनमे ढूंढा जा सकता है. मिश्र ने भी आतंकवादी पर अंकुश लगाने केलिए २७००० मस्जिदें बंद करवा दी है.

२१.    शिक्षण संस्थानों में सेकुलरिज्म के नाम पर हिंदुओं को धार्मिक शिक्षा देने पर पाबंदी है, किन्तु गैर-हिंदुओं को स्वतंत्रता दी गयी है जिसका दुष्परिणाम एक तो यह हो रहा है की हिंदू अपने सनातन धर्म और संस्कृति से विमुख हो रहे हैं तो वहीँ दूसरी ओर मुस्लिमों और ईसाईयों में धार्मिक कट्टरवादी शिक्षा के कारण कट्टरवाद और अराष्ट्रवाद बढ़ रहा है जिसके कारण देश की सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द को खतरा उत्पन्न हो गया है.

२२.    दक्षिण भारत के सभी विशाल मंदिरों का प्रबंधन सरकार द्वारा अपने हाथों में लिया जा चूका है और इन मंदिरों की आय का आधे से अधिक धन ईसाई और मुस्लिम संस्थाओं में बांटा जा रहा है.

२३.    कांग्र्रेसियों के लिए अल्पसंख्यक का अर्थ मुस्लिम और ईसाई होता है और अल्पसंख्यक हित के नाम पर सारे कार्य का एकमात्र उद्देश्य मुस्लिम वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करना होता है. यहाँ तक की इस धुन में देश हित अहित का भी ख्याल रखने की आवश्यकता महसूस नहीं होती है.

२४.    समाजवादी पार्टी ने तो हद ही कर दी है. इसने मुस्लिम वोट बैंक के लिए जेल में बंद सभी मुस्लिम आतंकवादियों की सजा माफ़ कर दिया था. सपा भारत को इस्लामी राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध सिमी पर से प्रतिबंध हटाने की मांग करती आई है.  

२५.    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के

  • करीब तीस हजार से अधिक इमामों को सम्मान के तौर पर हर महीने २५०० रूपये देने का वादा की
  • इमामों को निजी घर बनाने के लिए सरकार की ओर से भूमि देने और भवन निर्माण के लिए आर्थिक सहायता देने का वादा की
  • मुस्लिमों के लिए २०००० घर बनाने का वादा की
  • मुस्लिमों के रोजगार के लिए रोजगार बैंक स्थापित करने का वादा की
  • मुस्लिमों की शिक्षा के लिए मदरसों की स्थापना की घोषणा की

२६.         यूपीए की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अफिडेविट देकर बताया की राम का कोई एतिहासिक अस्तित्व नहीं है. इतिहास के किताबों में भी पढाया जा रहा है की राम और कृष्ण काल्पनिक पात्र हैं.  राम सेतु तोडने के लिए सरकार बेताब थी परन्तु मेट्रो मार्ग की खुदाई में मस्जिद का अवशेष मिलने पर तत्काल मेट्रो का मार्ग बदल दिया गया और मस्जिद निर्माण के वादों के ढेर लग गए.

२७.         भारत की हिंदू विरोधी दोगली कम्युनिष्ट मीडिया जो षड्यंत्र के तहत किसी मुस्लिम को कुछ होता है तो चौबीसों घंटे कई दिन तक रिपोर्टिंग कर हिंदुओं और हिन्दुस्तान के विरुद्ध दुष्प्रचार करती है जबकि मुसलमान हिंदुओं को मारते हैं, देवी देवताओं की मूर्तियों को तोड़ देते हैं तो उनपर सेकुलर ख़ामोशी छा जाती है. कुछ समसामयिक उदाहरण:

  • एक मुसलमान को रोजे में रोटी खिलाने की कोशिश पर कई दिनों बबाल हुआ परन्तु इसी दौरान मुसलमानों ने अमरनाथ यात्रियों पर हमला कर तीर्थयात्रियों को मारा, देवी देवताओं का अपमान किया यहाँ तक की कश्मीर पुलिस भी उन मुसलमानों के सहयोगी बन गयी परन्तु मीडिया और दोगले सेकुलर खामोश रहे.
  • एक गोकश अख़लाक़ के मौत पर मीडिया आज तक चीख चिल्ला रही है, परन्तु इसी बिच मस्जिद के आगे सिर्फ होर्न बजाने पर मुसलमानों ने एक हिंदू की हत्या कर दी, सिर्फ शोर न करने के लिए कहने पर दिल्ली में मुसलमानों ने एक हिंदू की हत्या कर दी, गौ तस्करों को पकड़ने गए सब इंस्पेक्टर मनोज मिश्रा को मुसलमानों ने गोली मारकर हत्या कर दी, एक गौ सेवक प्रशांत पुजारी की हत्या कुछ मुसलमानों ने कर दी परन्तु दोगली मीडिया आजतक सिर्फ अख़लाक़ पर छाती पीट रही है और इनकी खबर देने से भी भाग रही थी.
  • बंगाल में नन का रेप होने पर बिना किसी जांच पडताल के हिंदुओं को इसके लिए दोषी ठहरा दिया गया और महीनों हिंदुओं को कोसा गया, परन्तु जांच में पता चला के वे सब बंगलादेशी मुसलमान थे. इसी प्रकार नवी मुंबई, कर्नाटक और दिल्ली में चर्च पर हमले हुए और हिंदुओं को महीनों बुरा भला कहा गया परन्तु जांच में पता चला की इन तीनों मामलों में चर्च के ही कर्मचारी और ईसाई इसके लिए जिम्मेदार थे. इसी दौरान कई मंदिरों पर हमले और बम बिस्फोट हुए जिसकी मीडिया ने चर्चा तक नहीं की.

२९.    दोगले सेकुलर राजनेता और दोगली कम्युनिष्ट मीडिया की तरह ही दोगले सेकुलर बुद्धिजीवियों ने भी अपने नंगापन का घृणित प्रदर्शन किया है जिसकी जितनी भी निंदा की जाय कम है. सबसे घृणित और खतरनाक बात तो यह है की एक तरफ जहाँ विश्व के देश और संयुक्त राष्ट्र संघ इस्लामी आतंकवाद से बचने केलिए नित्य नए नए सुरक्षा कानून बना रहे हैं और सख्त कदम उठा रहे हैं, मसलन, अंगोला ने इस्लाम पर ही बैन लगा दिया है, चीन इस्लाम और मुसलमान पर कई तरीके के प्रतिबंध सुरक्षा की दृष्टि से लगाये हैं, फ़्रांस, चीन, आस्ट्रेलिया आदि देशों ने बुर्के में आतंकवादी खतरे की डर से बुर्के पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. मिश्र ने २७००० मस्जिदों पर ताला लगा दिया है, पाकिस्तान ने हजारों मदरसे बंद करवा दिए हैं आदि वहीँ भारत के सेकुलर राजनेता, मीडिया और बुद्धिजीवी दिन रात मुसलमानों के अंडकोष चाटने में व्यस्त हैं जो देश की एकता अखंडता और सुरक्षा केलिए खतरनाक है.

       भारत में हिंदू और मुस्लिम-ईसाई के बीच सामाजिक स्तर पर कोई रंजिश नहीं होता यदि सेकुलरिज्म के नाम पर हिन्दू विरोधी षड्यन्त्र और तुष्टिकरण की राजनीती न होती. देश में सांप्रदायिक सौहार्द, एकता और अखंडता को वास्तविक खतरा छद्म धर्मनिरपेक्षवादियों से है. इन छद्म धर्मनिरपेक्षवादियों ने भारतीय इतिहास को विकृत कर हमारे गौरवशाली अतीत, हमारी सभ्यता और संस्कृति, हमारे परम वैभवशाली पूर्वज आदि की अवहेलना कर हमारे गौरव और हमारे पुरुषार्थ को अपमानित किया है. धूर्त मियां जवाहर लाल नेहरु के समय से ही ऐसी मानसिकता बना दी गयी है की मुस्लिमों के बुरे से बुरे कार्यों का यदि विरोध किया जाता है तो उसे हिंदू बनाम मुस्लिम का सांप्रदायिक रंग देकर विरोध की धार कुंठित कर मुस्लिमों की उछ्रिंखलता बढ़ाई जाती रही है.

“मुस्लिम लीग के जिन नेताओं ने बंटवारे का समर्थन किया वे विभाजन के बाद पाकिस्तान नही गए. वे रातोरात कांग्रेस में शामिल हो गए. पार्टी बदलने से उनकी मानसिकता नही बदली. वही विभाजनकारी मानसिकता सेकुलरवाद के नाम पर पोषित हो रही है. वास्तविकता तो यह है कि भारत के रक्तरंजित बंटवारे का समर्थन करनेवाली मानसिकता ही आज सेकुलरवाद का दूसरा नाम है.” (साभार: दैनिक जागरण)

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5 thoughts on “हिन्दुओं के विरुद्ध सेकुलरिज्म का षड्यंत्र

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