shak or scythian
नवीनतम शोध, पौराणिक काल, प्राचीन भारत

शक (Scythian) भारतवर्ष से निर्वासित सूर्यवंशी क्षत्रिय थे

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आधुनिक इतिहासकारों कि सबसे बड़ी खामियां यह है कि वे क्रिश्चियन विश्वास (बाईबल के अनुसार सृष्टि का निर्माण ४००४ ईस्वीपूर्व) के कारण उनकी ऐतिहासिक दृष्टि ३००० ईस्वीपूर्व के आसपास सिमट जाती है. उससे आगे उनमें सोचने समझने कि क्षमता दिखाई ही नहीं पड़ती है. ईसाई-मुस्लिम इतिहासकारों में जानबूझकर ईसापूर्व और इस्लाम पूर्व इतिहास को नकारने की भी गलत प्रवृति पाई जाती है. इसलिए तो इतिहासकार पी एन ओक ईसाई, इस्लामी और वामपंथी इतिहासकारों को इतिहास का दुश्मन लिखते हैं. दूसरी ओर भारतीय ग्रंथों में सहस्त्रों वर्ष पुरानी इतिहास लिखित रूप में उपलब्ध हैं, परन्तु भारत के “ईसाई” ब्रिटिश सरकार और…

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गौरवशाली भारत-१०
गौरवशाली भारत

गौरवशाली भारत-१०

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226.      रमजान, रामदान वास्तव में रामध्यान शब्द है. अर्बस्थान के लोग प्राचीन समय से रमझान के पुरे महीने में उपवास रखकर भगवान राम का ध्यान पूजन करते थे. इसीलिए रमझान का महीना पवित्र माना जाता है-पी एन ओक 227.      मक्का की देवमूर्तियों के दर्शनार्थ प्राचीन (इस्लामपूर्व) काल में जब अरब लोग यात्रा करते थे तो वह यात्रा वर्ष की विशिष्ट ऋतू में ही होती थी. शायद वह यात्रा शरद ऋतू में (यानि दशहरा-दीपावली के दिनों में) की जाती थी. प्राचीन अरबी पंचांग (वैदिक पंचांग के अनुसार) हर तिन वर्षों में एक अधिक मास जुट जाता था. अतः सारे त्यौहार नियमित…

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gauravshali bharat
गौरवशाली भारत

गौरवशाली भारत-९

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201.      ईजिप्त के इतिहासकार Bengsch Bey लिखते हैं, “अति प्राचीनकाल में भारत से लोग आकर ईजिप्त में नील नदी के किनारे बसे. स्वयं ईजिप्त के लोगों में यह भावना व्याप्त है कि वे किसी अन्य अद्भुत देश से ईजिप्त में आ बसे. वह देश हिन्द महासागर के किनारे का पवित्र पन्त देश (पंडितों का देश) था. वह उनलोगों के देवताओं का मूल देश था. वह पन्त देश भारत के अतिरिक्त अन्य कोई हो ही नहीं सकता. (Pg. 123, The Theosophist मासिक, मार्च १८८१) २०२.  ईजिप्त के शिलालेखों से पता चलता है कि फराओ संकर्राह (राजा शंकर) ने कई प्रजाजनों को…

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buddh and bauddh
नवीनतम शोध, मध्यकालीन भारत

अरबों द्वारा मध्य एशिया में बौद्ध राज्यों, बौद्ध धर्म और बुद्धिष्टों के सम्पूर्ण विनाश का इतिहास

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पिछले दो लेखों, मध्य एशिया का वैदिक इतिहास: सावित्री-सत्यवान से बौद्ध राज्यों के उदय तक और मध्य एशिया का वैदिक इतिहास: बौद्ध राज्यों के उदय, विस्तार और तीर्थस्थलों के भ्रमण, से साबित हो गया है कि मध्य एशिया भारत और भारतियों के लिए विलायंत नहीं बल्कि भारतवर्ष का ही हिस्सा था. प्राचीन मद्र, साल्व राज्य और कम्बोज महाजनपद मध्य एशिया में ही था. सावित्री-सत्यवान और नकुल सहदेव के मामा साल्व नरेश शल्य मध्य एशिया के ही थे. उन्ही हिन्दुओं में से कुछ ने परवर्ती काल में बौद्ध धर्म अपनाकर अपने राज्यों को बौद्ध धर्मी राज्य घोषित किया था. बौद्ध धर्म…

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Indian-history
नवीनतम शोध, प्राचीन भारत

मध्य एशिया का वैदिक इतिहास: बौद्ध राज्यों के उदय, प्रसार और तीर्थस्थलों का भ्रमण

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पश्चिमोत्तर भारतवर्ष का बाह्लीक प्रदेश जो उत्तरी अफगानिस्तान और तुर्कमेनिस्तान-उज्बेकिस्तान में विस्तृत था सिकन्दर के आक्रमण के समय से ही ग्रीकों के कब्जे में आ गया था. मध्य एशिया में प्रथम बौद्ध राज्य यही बाह्लीक प्रदेश (बैक्ट्रिया) बना. यह एक राजनितिक निर्णय था. आधुनिक पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बहुत से राज्य अशोक के समय बौद्ध धर्मी या बौद्ध धर्म के संरक्षक बन गये थे. बहुत बड़ी संख्यां में यहाँ के हिन्दू भी बौद्ध धर्म अपना लिए थे. ग्रीको-बैक्ट्रियन बौद्ध शासन ग्रीको-बैक्ट्रियन राज्य कि स्थापना दिवोदत प्रथम (२४५-२३० ईस्वीपूर्व) ने किया था. इसी के वंश में दिमित्री (डेमेत्रियस) आगे राजा बना…

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central asia
नवीनतम शोध, पौराणिक काल, प्राचीन भारत

मध्य एशिया का वैदिक इतिहास-सावित्री-सत्यवान से बौद्ध राज्यों के उदय तक

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मध्य एशिया का ताजीकिस्तान, कीर्गीस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान आधुनिक भारत, अफगानिस्तान, ईरान से उपर काश्पीय सागर तक विस्तृत है. यही वह क्षेत्र है जहाँ से आर्यजन द्रविड़ों या असुरों को खदेड़ते हुए हड़प्पा सभ्यता को नष्ट करते हुए १५०० ईस्वीपूर्व भारत में घुस आये थे ऐसा झूठ साम्राज्यवादी और वामपंथी इतिहासकार फैला रखे थे. कारण था यहाँ उन्हें प्राचीन वैदिक संस्कृति के विपुल प्रमाण मिले थे और उनमें से सबसे प्रमुख प्रमाण ये लोग यह मानते थे कि इस क्षेत्र के लोगों के देवी देवताओं के नाम ठीक वही हैं जो आर्यों का था या भारतियों का है. इसलिए प्राचीन…

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Sun God
नवीनतम शोध, पौराणिक काल

प्राचीनकाल में पूरे यूरेशिया में सूर्य उत्तरायण का पर्व मनाया जाता था

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ईसाई और इस्लाम पंथों के प्रसार से पूर्व न सिर्फ भारतवर्ष में बल्कि पूरे यूरेशिया के विभिन्न देशों, विभिन्न सभ्यताओं, विभिन्न कालखंडों में सूर्य पूजा और सूर्य उत्तरायण का पर्व मनाने का एक लम्बा इतिहास मिलता है. यूरेशिया के विभिन्न देशों/सभ्यताओं में सूर्य देवता को विभिन्न नामों से जाना जाता था जिसकी सूचि नीचे है: सूर्य देवता के विभिन्न नाम- देश/सभ्यता का नाम अमित्रसू-जापान Hepa, Arrena, Istanu-Hittite (सीरिया)        अपोलो-ग्रीस और रोम                                          Helios (Helius)-Greece Usil, Helios-Etruscan                                             Gaulish-Celtic                                                          Mithra-Iranian/Persian                                                       Re (Ra), Aten, Horus-Egypt Hors-Slavic Sol (Sunna)-Norse Sól, Sunna, Sunne-German Sulis-British                                                                              Shamash-Mesopotamia Shpash-Canaanite Koyash-Turki Etain-Irish Xu Kai-Chin भारत में ईसाईयों की…

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hindushahi dynasty
प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत

अफगानिस्तान के अंतिम हिन्दू राजवंश के संघर्ष कि गौरवगाथा

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अफगानिस्तान भारतवर्ष का वह हिस्सा है जहाँ ५०००० वर्ष पहले के मानवीय बसावट (वैदिक आर्य संस्कृति) का एतिहासिक सबूत मिला है (विकिपीडिया). अर्बस्थान (अरब) में जब इस्लाम का उदय हुआ तो देखते ही देखते तुरगस्थान (तुर्की) के हिन्दू, बौद्ध, इराक के राजा बरमक बौद्ध, ईरान के पहलव क्षत्रिय, समरकंद के बौद्ध राजा आदि के इस्लामीकरण के बाद बारी भारतवर्ष के अफगानिस्तान वाले हिस्से की थी. इतिहासकार पी एन ओक लिखते हैं, “यूरेशिया के महान वैदिक आर्य संस्कृति के लोग “अहिंसा परमोधर्म:” की मूर्खतापूर्ण माला जपते हुए “हिंसा लूट परमोधर्म:” की संस्कृति में समाते जा रहे थे.” अरब के आक्रमणकारियों ने…

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hindu-buldings
पौराणिक काल

प्राचीन Egypt में वैदिक आर्य संस्कृति थी

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Egypt के बेबिलोनिया में नरसिंह अवतार हुआ था और बाइबिल के Genesis यानि जन्म अथवा आरम्भ XI-7 नाम के भाग में इसका उल्लेख है. एसा थॉमस मॉरिस का मानना है. उन्होंने अपने ग्रन्थ में लिखा है, “इसमें कोई संदेह नहीं की जब मानवजाति तितर-बितर हुई तब जो लोग Egypt में गए वे उस भयंकर (नरसिंह अवतार की) इतिहास की स्मृतियाँ साथ ले गए. उनका वही (नरसिंह) नाम था जो भारतीय परम्परा में है.” वे आगे लिखते हैं, “Egypt में आधा नर और आधा सिंह ऐसी जो स्फिंक्स (Sphinx) नाम की अद्भुत प्रतिमा बनी है उसका स्रोत नरसिंह अवतार ही तो…

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etruscan painting
पौराणिक काल

इटली की Etruscan सभ्यता वैदिक सभ्यता थी

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इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश ओक कहते हैं यूरोप की मूल अनादि संस्कृति वैदिक थी और ग्रीस तथा रोम उस परम्परा के गढ़ थे. यहाँ भी चतुर्वर्ण व्यवस्था थी. रोमन साम्राज्य वस्तुतः रामन सम्राज्य था और रोम वास्तव में राम का ही इतालवी उच्चार है जिसकी स्थापना ईसापूर्व ७५३ ईस्वीपूर्व में Etruscan लोगों ने की थी. वे लिखते हैं कि रोम नगर के राम नगर होने के एक प्रमाण यह भी है कि रोम नगर के सामने  दूसरी ओर रावण (Revenna) नगर बसा है. इतिहासकार एडवर्ड पोकोक  ने भी अपने ग्रन्थ के पृष्ठ १७२ पर लिखा है, “Behold the memory of …Ravan…

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