marthand varma
आधुनिक भारत, ऐतिहासिक कहानियाँ

डचों को भारत से खत्म करनेवाले मार्तण्ड वर्मा को भुला दिया

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यूरोपीय देश के लोगों को समुद्र में अजेय माना जाता था पर आपको पता है लगभग २५० साल पहले केरल के राजा मार्तण्ड वर्मा ने डच समुद्री सेना को हरा दिया था, वह भी पारंपरिक हथियारों से. लेकिन विदेशियों के मानसिक गुलाम हमारे इतिहासकारों ने इस गौरवपूर्ण विजय का इतिहास दबा दिया. वस्तिकता तो यह है कि भारत प्राचीनकाल से समुद्री शक्ति रहा था, हाँ, इस्लामिक काल में यह शक्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुआ था. पर चोल राजाओं ने जिस प्रकार दक्षिण और दक्षिण पूर्व के समुद्री राज्यों पर विजय प्राप्त कर वहां वैदिक आर्य संस्कृति का विस्तार किया…

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hindushahi dynasty
प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत

अफगानिस्तान के अंतिम हिन्दू राजवंश के संघर्ष कि गौरवगाथा

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अफगानिस्तान भारतवर्ष का वह हिस्सा है जहाँ ५०००० वर्ष पहले के मानवीय बसावट (वैदिक आर्य संस्कृति) का एतिहासिक सबूत मिला है (विकिपीडिया). अर्बस्थान (अरब) में जब इस्लाम का उदय हुआ तो देखते ही देखते तुरगस्थान (तुर्की) के हिन्दू, बौद्ध, इराक के राजा बरमक बौद्ध, ईरान के पहलव क्षत्रिय, समरकंद के बौद्ध राजा आदि के इस्लामीकरण के बाद बारी भारतवर्ष के अफगानिस्तान वाले हिस्से की थी. इतिहासकार पी एन ओक लिखते हैं, “यूरेशिया के महान वैदिक आर्य संस्कृति के लोग “अहिंसा परमोधर्म:” की मूर्खतापूर्ण माला जपते हुए “हिंसा लूट परमोधर्म:” की संस्कृति में समाते जा रहे थे.” अरब के आक्रमणकारियों ने…

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पौराणिक काल

प्राचीन Egypt में वैदिक आर्य संस्कृति थी

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Egypt के बेबिलोनिया में नरसिंह अवतार हुआ था और बाइबिल के Genesis यानि जन्म अथवा आरम्भ XI-7 नाम के भाग में इसका उल्लेख है. एसा थॉमस मॉरिस का मानना है. उन्होंने अपने ग्रन्थ में लिखा है, “इसमें कोई संदेह नहीं की जब मानवजाति तितर-बितर हुई तब जो लोग Egypt में गए वे उस भयंकर (नरसिंह अवतार की) इतिहास की स्मृतियाँ साथ ले गए. उनका वही (नरसिंह) नाम था जो भारतीय परम्परा में है.” वे आगे लिखते हैं, “Egypt में आधा नर और आधा सिंह ऐसी जो स्फिंक्स (Sphinx) नाम की अद्भुत प्रतिमा बनी है उसका स्रोत नरसिंह अवतार ही तो…

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bappa rawal
ऐतिहासिक कहानियाँ, मध्यकालीन भारत

भारत की शान परमशक्तिशाली रघुवंशी राजा बाप्पा रावल

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बाप्पा रावल एक बालक की गाय रोज दूध दुहने के समय कहीं चली जाती थी. उस बालक को अक्सर भूखा रहना पड़ता था, इसलिए एक दिन वो गाय के पीछे पीछे गया और देखा गाय एक ऋषि के आश्रम में जाकर एक शिवलिंग पर अपने दूध से अभिषेक करने लगी. बालक अचम्भित देख ही रहा था कि तभी उसने देखा उसके पीछे एक ऋषि खड़े मुस्कुरा रहे हैं. उस ऋषि का नाम था “हारीत ऋषि” और वह बालक बाप्पा रावल के नाम से विख्यात हुआ. हारीत ऋषि ने ही उस बालक को शिक्षा दीक्षा दी और उनके सहयोग से ही…

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मध्यकालीन भारत

हिन्दू मन्दिर और भवन जो अब मुस्लिम इमारतें कहलाती है

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हिन्दू इमारतें मुझे महान राष्ट्रवादी इतिहासकार स्वर्गीय पुरुषोत्तम नागेश ओक से पत्राचार का अवसर प्राप्त हुआ था. मैं जब मुंबई में था तो उनके भारतीय इतिहास शोध संस्थान का सदस्य भी रहा हूँ. बाबरी मस्जिद तोड़े जाने पर जब मैंने उनसे पूछा था कि आपकी क्या राय है तो उन्होंने ॐ को ७८६ को उल्टा लिखकर समझाते हुए कहा था कि आक्रमणकारी कभी निर्माता नहीं थे. वे हिन्दू इमारतों का केवल स्वरूप चेंज कर देते थे जैसे उन्होंने ॐ को ७८६ (अरबी में उल्टा लिखा जाता है) कर दिया था. उन्होंने कहा था जिस ढांचे को तोड़ा गया वो वास्तव…

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hindu architecture
गौरवशाली भारत, प्राचीन भारत

वैदिक स्थापत्य ही पूरे विश्व के स्थापत्य कला की जननी है

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वैदिक स्थापत्य कला विश्व में स्थापत्यकला के दर्जनों प्राचीन ग्रन्थ हैं और वे ग्रन्थ सिर्फ संस्कृत में हैं, इसलिए वे वैदिक सभ्यता के धरोहर है. वैदिक स्थापत्य यानि वास्तुकला और नगर-रचना की पूरी विधि मूल तत्व आदि विवरण जिन संस्कृत ग्रंथों में मिलता है उन्हें अगम साहित्य कहा जाता है. ये ग्रन्थ बहुत प्राचीन हैं. मानसार शिल्पशास्त्र के रचयिता महर्षि मानसार के अनुसार ब्रह्मा जी ने नगर-निर्माण और भवन-रचना विद्याओं में चार विद्वानों को प्रशिक्षण दिया. उनके नाम हैं-विश्वकर्मा, मय, तवस्तर और मनु. शिल्पज्ञान (Engineering) की सबसे प्राचीन संस्कृत ग्रन्थ है भृगु शिल्पसन्हिता. किले, महल, स्तम्भ, भवन, प्रासाद, पूल, मन्दिर,…

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mihir-bhoj
ऐतिहासिक कहानियाँ, मध्यकालीन भारत

दुश्मनों का काल रघुवंशी राजा मिहिर भोज प्रतिहार

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सम्राट महिर भोज प्रतिहार वीरों और योद्धाओं की जाति गुर्जर प्रतिहार रघुवंश शिरोमणि श्रीराम के अनुज लक्ष्मण के वंशज हैं. इस वंश में एक से एक महाभट योद्धा और पराक्रमी शासक हुए जिसकी जितनी चर्चा और प्रशंसा की जाये कम है. इसी गौरवशाली वंश में सम्राट मिहिर भोज का जन्म हुआ था. उन्होंने ८३६ ईस्वी से ८८५ ईस्वी तक कभी कन्नौज तो कभी उज्जैन से शासन किया. भले ही वामपंथी इतिहासकारों ने मिहिर भोज के इतिहास को काट देने की साजिश की है, मिहिर भोज क्या उन सभी महान भारतीय सम्राटों और योद्धाओं को भारतीय इतिहास से गायब कर दिया…

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Bakhtiyar Khilji
ऐतिहासिक कहानियाँ, मध्यकालीन भारत

बिहार, बंगाल का विनाशक बख्तियार खिलजी को असम के वीरों ने दौड़ा दौड़ा कर मारा

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बख्तियार खिलजी मोहम्मद बख्तियार खिलजी गर्मसिर प्रान्त के गोर स्थान का जन्मजात लूटेरा था. अपनी लूटेरी प्रवृति के कारन वह लूटेरों के सरदार मोहम्मद गोरी के दल में शामिल हो गया और लूटपाट में अधिक से अधिक हिस्सेदारी पाने और बड़े ओहदे केलिए मोहम्मद गोरी के काम पिपासा शांत करने हेतु औरतों की दलाली करने लगा. वह हिन्दुओं, बौद्धों, जैनों को लूटने, कत्ल करने के साथ साथ उनकी स्त्रियों, बहनों और बेटियों को सेक्स गुलाम बनाकर बेचने का धंधा भी करने लगा. शैतान बख्तियार खिलजी की पैशाचिक प्रतिभा को देखते हुए मुहम्मद गोरी के अवध का सिपहसालार मलिक हिसामुद्दीन ने…

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प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत

भारत की ऐतिहासिक इमारतें हिन्दू, बौद्ध, जैन निर्मित है

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हिन्दू इमारतें भारत के ऐतिहासिक इमारतों को मुस्लिम इमारतें, मस्जिदें, मकबरे आदि होने का झूठ अलेक्जेंडर कनिंघम नाम के लुच्चे अंग्रेज जो दुर्भाग्य से भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग का प्रथम अध्यक्ष था ने जानबूझकर फैलाया था. यहाँ तक की उनके सर्वेक्षकों ने जिन इमारतों को हिन्दू इमारतें पाया उन्हें भी डांटकर चुप करा दिया. जैसे की सर्वेक्षक जोसेफ बैगलर ने कुतुबमीनार और उसके आस पास के इमारतों को हिन्दू इमारतें घोषित किया तो धूर्त कनिंघम ने उसे चुप करा दिया-पी एन ओक कनिंघम के फैलाये उस झूठ को ही मुस्लिमपरस्त, हिन्दूविरोधी वामपंथी इतिहासकार ज्यों के त्यों फ़ैलाने लगे. जब उनसे…

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vishnu mandir
ऐतिहासिक कहानियाँ, मध्यकालीन भारत

बंगाल में त्रिवेणी संगम पर स्थित जफर खान गाजी का दरगाह प्राचीन विष्णुमन्दिर है

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A true history of Triveni, Hooghly of Bengal; you must not have been taught. दक्षिण बंगाल के सप्तग्राम (हूगली जिले में) में मान नृपति नाम का एक स्थानीय क्षत्रप था. प्राचीनकाल में सप्तग्राम एक विश्वप्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय व्यापार क्षेत्र था. यह बंगाल का प्रसिद्ध बन्दरगाह था. सप्तग्राम एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल भी था. इसी सप्तग्राम में पवित्र तीर्थस्थल त्रिवेणी था. बंगाल के हूगली जिले में त्रिवेणी बंडेल से ४ किमी दूर, बांसबेरिया, शिवपुर में है. यहाँ गंगा के साथ यमुना की एक धारा और दक्षिण सरस्वती की एक धारा (सोलहवीं सदी तक) आकर मिलती थी इसलिए इसे दक्षिण का प्रयाग भी कहा…

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