छद्म धर्मनिरपेक्षवाद
आधुनिक भारत, राष्ट्रीय मुद्दे

छद्म धर्मनिरपेक्षवाद आतंकवाद से ज्यादा खतरनाक है भाग-1

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हमारे देश को जिहादी, आतंकी मानसिकता से ज्यादा खतरा छद्म धर्मनिरपेक्षवाद से है। छद्मधर्मनिरपेक्षवादी पाकिस्तान, पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों और स्लीपर सेल से भी ज्यादा खतरनाक है। एक उदहारण द्वारा समझते हैं। मान लीजिए एक मुस्लिम आतंकी हमला करता है या एक मुस्लिम आत्मघाती बम हमला करता है तो वह कितने हिन्दुओं, बौद्धों, सिक्खों या जैनों की हत्या करेगा? दस, बीस, पचास या सौ? परन्तु एक छद्म सेकुलर वामपंथी के बारे में सोचिए जो हमारे बीच रहकर, हमारे जैसा दिखकर, हमारे जैसा बनकर हमारे सनातन धर्म, हमारा हिन्दुस्थान और हम हिन्दुओं के विरुद्ध काम करता है। मुस्लिम आत्मघाती बम तो दुसरे…

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mohammad-ali-jinna
आधुनिक भारत

नव धर्मान्तरित मोहम्मद अली जिन्ना

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नव धर्मान्तरित ज्यादा खतरनाक होते हैं भाग-3:    मोहम्मद अली जिन्ना (कारण, नव धर्मान्तरित को साबित करना होता है कि 1. जिस नाले में उसने डुबकी लगाई है वह पवित्र गंगाजल से बेहतर है और 2. उसे नाले में रहने केलिए अनुकूलित होना पड़ता है।) बेशक पाकिस्तान का जन्म धर्म के आधार पर हुआ और उसके संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना था पर पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के पिता हिंदू परिवार में पैदा हुए थे। एक नाराजगी के चलते उन्होंने अपना धर्म बदल लिया। वो मुस्लिम बन गए। ताजिंदगी न केवल इसी धर्म के साथ रहे बल्कि उनके बच्चों…

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संभल-हरिहर-मंदिर
आधुनिक भारत, मध्यकालीन भारत, राष्ट्रीय मुद्दे

संभल के हरिहर मंदिर, अब जामी मस्जिद, का इतिहास

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भगवान कल्कि को समर्पित श्री हरिहर मंदिर के बारे में माना जाता है कि इसका निर्माण सृष्टि के आरंभ में भगवान विश्वकर्मा ने किया था। हिन्दू धर्मशास्त्रों में इस मंदिर का विशेष महत्व है। शास्त्रों में इसे भगवान विष्णु और भगवान शिव की एकता का प्रतीक बताया गया है। हिन्दू ग्रंथों में लिखा है, ““यथा शिवस्तथा विष्णु, यथा विष्णुस्तथा शिवः” जिसका अर्थ है ‘जैसे शिव हैं, वैसे ही विष्णु हैं; जैसे विष्णु हैं, वैसे ही शिव हैं।’ संभल महात्म्य में जामा मस्जिद को तीर्थों का केंद्र बिंदु दर्शाया है संभल नगर धार्मिक नजरिये से भी ऐतिहासिक है। संभल महात्म्य पुस्तक…

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लव जिहाद
राष्ट्रीय मुद्दे

लव जिहाद को रोकने में स्त्रियों को महत्वपूर्ण भूमिका निभाना होगा

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सभी माताओं, बहनों एवं बेटियों को प्रणाम! कुछ दशकों से हमारी बहन, बेटियां लव जिहाद की शिकार हो रही है जो पिछले कुछ बर्षों से विकराल रूप लेता जा रहा है। मैं सिर्फ अपनी बात कहता हूँ, मैं न्यूज में देखता हूँ कि औसतन हमारी 2-4 बहन, बेटियां प्रतिदिन जिहादियों द्वारा लव जिहाद/गैंगरेप/रेप/रेप-मर्डर की शिकार हो रही है। अनरिपोर्टेड कितने होंगे कहना मुश्किल है। एक वीडियो है उनमें लगभग सौ ऐसे मामले दिखाए गये हैं जिनमें अधिकांश इसी वर्ष का है और मुख्य रूप से अप्रैल से जुलाई 2024 का है। ऐसे सैकड़ों न्यूज कटिंग/स्क्रीनशॉट मेरे पास हैं जिनकी ये…

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King-David-of-Israel
नवीनतम शोध, पौराणिक काल, प्राचीन भारत

रामायणकालीन पेलेस्टाइन का इतिहास

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पेलेस्टाइन का उपर्युक्त मानचित्र इजरायल के तीसरे यहूदी राजा डेविड (970-1000 BC) का है. बाईबल में इसका उल्लेख इजरायल के प्रथम और महान राजा के रूप में हुआ है. कुरान में इसका उल्लेख इजरायल के महान राजा और प्रोफेट के रूप में हुआ है जिसने युद्ध में फिलिस्तीनी राक्षस का वध किया था. राजा सुलेमान इसी का बेटा और उत्तराधिकारी था. ईसा मसीह का जन्म इसी राजकुल में हुआ था. राजा डेविड ने यहूदियों के 12 जत्थों को एकजुट कर पेलेस्टाइन में एक महान साम्राज्य का निर्माण किया था जिसे इजरायल कहा गया. इस साम्राज्य का विस्तार दक्षिण में मिस्र…

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पेरियार
आधुनिक भारत

उत्तर भारतियों का दुश्मन, देश का गद्दार ई वी रामास्वामी पेरियार!

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1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हिन्दू और मुसलमानों ने एक साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध लडाई लड़ी थी जिससे भयभीत होकर अंग्रेजों ने भारत में फूट डालो, राज करो की नीति का सूत्रपात किया. इसके तहत उसने सबसे पहले हिन्दुओं और मुसलमानों में फूट डालने केलिए सैय्यद अहमद खां को मुहरा बनाया जो मुसलमानों को हिन्दुओं का विरोध और ब्रिटिश सरकार का समर्थन करने केलिए उकसाने लगा. अंग्रेजों ने अहमद खान को सफल बनाने केलिए भारत में जितने भी प्राचीन हिन्दू इमारतें जो मुसलमानों के कब्जे में थी परन्तु ब्रिटिश सर्वेक्षण में वे हिन्दू इमारतें सिद्ध हुई थी…

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hindu-India
नवीनतम शोध, प्राचीन भारत

हिन्दू शब्द की उत्पत्ति सिन्धु से नहीं इंदु से?

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साम्राज्यवादी एवं वामपंथी इतिहासकारों के अनुसार हिन्दू शब्द की उत्पत्ति सिन्धु से हुई है और उसी से हिन्द और हिंदुस्तान बना है. और ऐसा इसलिए की फारस/पर्शिया/ईरान के लोग स का उच्चारण ह करते थे. इसमें ईरानी का ईक प्रत्यय लगाने से हिन्दीक शब्द बना जिसका अर्थ ‘हिन्द का’ है. यूनानी इंदिका या यूरोपियन इंडिया आदि इसी हिन्दीक शब्द से ही बने हैं. परन्तु साम्राज्यवादी इतिहास भारत की गौरवशाली प्राचीन सभ्यता, संस्कृति, परम्परा और इतिहास की अवहेलना तथा ईसाई मत, कि सृष्टि का निर्माण सिर्फ ४००४ ईस्वी पूर्व हुआ था, जैसे दोषों से युक्त होने के कारण विश्वसनीय नहीं है.…

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Kamboj
नवीनतम शोध, प्राचीन भारत

भारतवर्ष का कम्बोज महाजनपद मध्य एशिया में था

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भारत के वामपंथी इतिहासकार भारत के सोलहवें महाजनपद कम्बोज को अफगानिस्तान, पाकिस्तान और कश्मीर में विस्तृत दिखाते हैं परन्तु आधुनिक ऐतिहासिक शोधों से स्पष्ट हो गया है कि प्राचीन कम्बोज मध्य एशिया के आधुनिक ताजीकिस्तान और उसके आसपास के क्षेत्रों में विस्तृत था. भारतीय इतिहासकार जिस कम्बोज महाजनपद को दिखाते हैं वे अधिकांशतः कम्बोजों के विजित भारतीय क्षेत्र थे. कंबोज प्राचीन भारत के १६ महाजनपदों में से एक था. इसका उल्लेख पाणिनी के अष्टाध्यायी और बौद्ध ग्रन्थ अंगुत्तर निकाय और महावस्तु मे कई बार हुआ है. राजपुर (राजौरी), द्वारका (?) तथा कपिशा (काबुल से ५० मील उत्तर) इनके प्रमुख नगर…

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vedic-bharatvarsha
प्राचीन भारत

क्या वैदिक लोग घुमन्तु, कबीलाई और कबीले के सरदार मात्र थे?

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पश्चिमी इतिहासकारों की मानें तो मुट्ठी भर द्वीपों पर बसे और छोटे सा यूरोपीय राज्य ग्रीक और रोम में ही केवल विकसित सभ्यता थी, ग्रीक, रोमन साम्राज्य था और वहां सम्राट होते थे बाकी सब तो असभ्य (barbaric), घुमंतू (nomad), कबीले (tribe) और कबीले के सरदार (Chieftain) मात्र होते थे. पश्चिमी इतिहासकारों की नजर में कैसे कैसे असभ्य, घुमन्तु, कबीले और कबीले के सरदार होते थे उसका कुछ उदाहरन देखिए: छठी शताब्दी ईस्वी पूर्व के ईरान का अखामानी (Achamanid) साम्राज्य जो, इन्ही इतिहासकारों के शब्दों में, मध्य एशिया से लेकर तुर्की, मिस्र और ग्रीस तक विस्तृत था; पर, तीन महाद्वीपों…

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Romak-Yavan
नवीनतम शोध, पौराणिक काल

युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में आनेवाले रोमक, यवन और सिंगवाले लोग कौन थे

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महाभारत में अर्जुन की दिग्विजय के प्रसंग में कम्बोज का लोह (लोहान) और ऋषिक जनपदों के साथ उल्लेख है (सभा. २७, २५). महाभारत के सभा पर्व के अनुसार ऋषिक जातियों ने लोहान, परमा कम्बोज के साथ मिलकर अर्जुन के दिग्विजय के दौरान उत्तरापथ के राज्यों के विजय में सहायता की थी. यह ऋषिक जनपद मध्य एशिया के आमू दरिया और शिर दरिया के मध्य स्थित था. आधुनिक एतिहासिक शोधों से लगभग सभी इतिहासकार सहमत हैं कि भारतीय ग्रंथों में वर्णित ऋषिक जातियां चीनी ग्रंथों में वर्णित यूची लोग अर्थात कुषाण हैं. ऋषिक जाति और कुषाणों पर आधुनिक शोध परक इतिहास…

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