आधुनिक भारत

पाकिस्तान के मदरसों में बन रही है हिन्दुस्थान को खत्म करने कि रणनीति

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पाकिस्तान के मदरसों पर आधारित यह लेख मुख्य रूप से दो रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी एस के दत्ता और राजीव शर्मा की पुस्तक ‘जिन्ना से जिहाद तक’ पर आधारित है जो हर देशभक्त भारतियों के लिए प्रासंगिक है और जानना जरुरी है क्योंकि इस लेख का सीधा सम्बन्ध हिन्दुओं, बौद्धों, सिक्खों, जैनों आदि तथा हम सबका घर हिन्दुस्थान की सुरक्षा से जुड़ा है.

मोहम्मद अली जिन्ना ने १९४६ ईस्वी में लेबर पार्टी के सांसद वुडरो वाट से कहा की ‘चूँकि अंग्रेज भारत में मुस्लिम शासन के उत्तराधिकारी थे, इसलिए उसे भारत मुसलमानों को वापस दे देना चाहिए’ हालाँकि ऐसा हुआ नहीं, परन्तु यह स्वप्न आज भी जीवित है और पाकिस्तान यह स्वप्न की भारत मुसलमानों का था अपने हर बच्चों के दिमाग में ठूंस ठूंस कर भर रहा है. इस बात की पुष्टि वहाँ बच्चों को पढाये जाने वाले इतिहास की किताबों से भी होता है.

पाकिस्तान का झूठा इतिहास

पाकिस्तान के मदरसों में बच्चों को यह विश्वास दिलाता है कि पाकिस्तान की नीब आठवी सदी में मोहम्मद बिन कासिम के समय में ही पड़ गयी थी जिसे मोहम्मद गजनबी ने आगे बढ़ाया और मोहम्मद गोरी ने राजनीतक स्थायित्व प्रदान किया तथा सल्तनत काल और मुग़ल काल में पूरे भारत पर पाकिस्तान का कब्जा हो गया था. पाकिस्तान बेशर्मी से इस बात को भूल जाता है कि वह जिस पाकिस्तान की बात करता है वह भारत और आज के पाकिस्तानी मुसलमानों के हिंदू पूर्वजों का अभिन्न अंग रहा है और ७१२ ईस्वी में मोहम्मद कासिम के आक्रमण से लेकर पाकिस्तान बनने तक उनके हिन्दू पूर्वजों के मुसलमान बनने की इस्लामी अत्याचार, बर्बरता, हिंसा, नृशंसता और बलात्कार का एक अंतहीन दर्दनाक इतिहास रहा है जो पाकिस्तानी हिंदुओं और सिक्खों पर अमानवीय अत्याचार और जबरन धर्मान्तरण के रूप में आज भी जारी है.

यही कारण है पाकिस्तान की घोषणा और भारत विभाजन के समय “हंसकर लिया है पाकिस्तान लड़कर लेंगे हिन्दुस्तान” का नारा बदले स्वरूप में अब भी “आज श्री नगर कल दिल्ली” के रूप में जारी है. पाकिस्तान के हिंदुओं और हिन्दुस्तान के विरुद्ध वैचारिक जेहाद को समझने के बाद आइये देखते हैं कि वह इसे अमली जामा पहनाने के लिए क्या क्या और कहाँ कहाँ तैयारियां कर रहा है.

पाकिस्तान में सत्ता के तीन केंद्र

पाकिस्तान में सत्ता और शक्ति के तीन ध्रुब हैं-राजनीती, सेना और जेहाद. पाकिस्तान की सेना और जेहादी दोनों एक ही सिक्के के दो पहलु हैं. पाकिस्तान जेहादियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिए हुए है और ये आईएसआई के प्रत्यक्ष नियंत्रण में काम करते है. पाकिस्तान तीनों स्तर पर भारत के विरुद्ध अपना अभियान चला रहा है. आतंकवादी संगठन लश्कर ए तोइबा (पवित्र लोगों की सेना) पाकिस्तान का अधिकृत जेहादी संगठन है जिसकी नीब पाकिस्तान के सैन्य शासक जेनरल जिया उल हक ने रक्खा था.

लश्कर-ए-तोइबा लाहौर से तीस किलोमीटर दूर मुरिन्डके में दो सौ एकड़ में फैले मुख्यालय से अपनी गतिविधियां संचालित करता है. यहाँ इस्लामी धर्मशास्त्र की पढाई तथा जेहाद के उपदेश दिए जाते हैं तथा एक वर्ष में लगभग एक लाख मुजाहिदीनों को जेहादी (आतंकवादी) कार्य के लिए प्रशिक्षित करते हैं. एक अनुमान के अनुसार तीन सौ से अधिक मदरसे उसके नियंत्रण में हैं जहाँ जेहाद की शिक्षा दी जाती है. जेहादी (आतंकवादी) कार्यों के लिए इसे पैसा मुख्यतः सउदी अरब, खाड़ी देशों तथा विश्व के मुसलमानों और प्रवासियों से नियमित दान में मिलता है.

लश्कर तोइबा ने अपने प्रेस रिलीज में बताया, “अपने जेहाद शिविर में हम तिन सप्ताह का प्रशिक्षण देते हैं जिसमे नवागंतुकों को ऐके रायफल से लेकर मिसाइल का परिचय दिया जाता है. उसके बाद गुरिल्ला युद्ध, बारूदी सुरंग बिस्फोट करना, मिसाईल व रोकेट चलाना, रिमोट कंट्रोल बम और मिसाईल बनाने में विशेषज्ञता हासिल करना सिखाया जाता है. (बुलेटिन ऑफ एटोमिक साईंटिस्ट, फरवरी २००१)

आतंकी संगठनों को पाकिस्तान के मदरसों से आतंकवादी प्राप्त होते है

पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों को जेहादी पाकिस्तान के मदरसों से प्राप्त होता है. वास्तव में पाकिस्तान के ग्रामीण इलाकों में आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने के साधन ही उपलब्ध नहीं है और उन्हें शिक्षा के लिए मदरसों में ही जाना पड़ता है. जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी देने के बाद जिया उल हक ने समर्थन के लिए धार्मिक दलों का सहारा लिया और मदरसों को प्रायोजित किया. पाकिस्तान के मदरसों को सरकारी अनुदान के आलावा जकात कोष से पैसा प्राप्त होता है जो व्यक्तिगत खाताधारकों से अनिवार्य रूप से कुछ रकम काटकर बनता है. मजहबी पाकिस्तान के मदरसों को अरब के अमीरों और खाड़ी के देशों से पर्याप्त धन मुहैया कराया जाता है . मस्जिदें भी मदरसों के लिए धन एकत्रित करती है. इस्लामी विधिशास्त्र के विद्वान उत्पन्न करने की बजाय ये मदरसे जेहाद के लिए कट्टरपंथी पैदा करते हैं. (द फ्रायडे टाईम्स, दिसम्बर १४-२०, २००१, लेखक सलमान हुसैन)

मदरसों में पढ़नेवाले बच्चों में जेहाद का जोश प्रेरित करने के लिए प्राथमिक पाठ्य पुस्तकों में कुछ नया जोड़ा गया है. अब जीम का अर्थ है जेहाद, टे का अर्थ है तोप, काफ का अर्थ है क्लाशिनकोव और खे का अर्थ है खून पढ़ाया जाता है. (ऑन द अबिस, लेखक तारिक अली)

पचास हजार से अधिक मदरसों में से अधिसंख्य जेहाद के नाम पर नफरत तथा हिंसा का पाठ पढाते हैं. ऐसे उपदेश पाकिस्तान में सांप्रदायिक हिंसा तथा विदेश में जेहाद को प्रेरित करते हैं. मदरसों को पंजीकृत करने तथा उनकी पाठ्य सामग्री में आधुनिक विषयों को शामिल करने का निर्णय आधे मन से किया गया परन्तु प्रतिकूल प्रतिक्रिया के भय से इसे लागू नहीं किया गया.

इन मदरसों का एकमात्र विषय कुरान के उपदेश हैं. अधिकतर मदरसे विज्ञान या गणित नहीं पढाते हैं. पाकिस्तानी अधिकारीयों ने जेसिका स्टर्न से कहा कि देश के १० से १५ प्रतिशत मदरसे केवल कट्टरवादी विचारधाराओं का उपदेश देते हैं उसे प्रोत्साहित करते हैं. किसी भी समय ढाई लाख हथियारबंद जेहादी पाकिस्तान में चारों ओर फैले रहते हैं. (बुलेटिन ऑफ द इकोनोमिक सायंटिस्ट, जनवरी-फरवरी, २००१)

पाकिस्तान में जिहाद पर विदेशी लेखकों की राय

जेसिका स्टर्न ने लाहौर स्थित एक महत्वपूर्ण मदरसे के प्रिंसिपल का अल्बर्ट आईन्स्टाईन के बारे में जानने के लिए साक्षात्कार किया. प्रिंसिपल ने आईन्स्टाईन के बारे में अनभिज्ञता जताई और कहा उसे विज्ञान पढाने या सीखने की कोई आवश्यकता महसूस नहीं होती है साथ ही उसने जेहाद द्वारा उपलब्धि की सलाह दी. सिपह-ए-सहबा के एक नेता मुजीब-उर-रहमान इंकलाबी का यह मत था कि “मदरसे जेहाद के लिए आधार हैं. मदरसे जेहाद की आपूर्ति के माध्यम हैं”.

जिन माँओं ने अपने पुत्रों को जेहाद के लिए समर्पित कर दिया था, वे यह सोचकर खुश थी कि उनके मृत पुत्र वास्तविक जीवन में उन्हें मुक्ति देंगे. मृत जेहादियों के परिवार अपने बच्चों के मृत्यु के बाद प्रसिद्ध हो जाते हैं और उन्हें सम्मान की नजर से देखा जाता है. मारे गये जेहादियों की मौत अन्य लोगों को जेहाद में शामिल होने को प्रोत्साहित करता है.

जेसिका स्टर्न ने देखा की कई उच्च कट्टरपंथी नेताओं के लिए जेहाद एक बड़ा व्यवसाय है जिसके लिए श्रम मदरसे के विद्यार्थी प्रदान करते हैं और पूंजी मजहबी तथा गैर-मजहबी कार्यकर्ताओं से प्राप्त की जाती हैं. ये कट्टरपंथी नेता बड़े बड़े भवनों में नौकर-चाकर के साथ विलासिता पूर्वक रहते हैं, इनके बच्चे विदेशों में अच्छी शिक्षा प्राप्त करते हैं जबकि जेहाद के लिए मुख्य रूप से कार्य करने वाले लोग निम्न और मध्यम वर्ग से प्राप्त होते हैं.

जेहादियों ने पामेला को बताया, “बदला लेना हमारा धार्मिक कर्तव्य है. हम अल्लाह की मदद से लड़ते हैं और एक बार जब हम जेहाद शुरू कर देते हैं तो कोई भी शक्ति हमारा सामना नहीं कर सकती. हमारी हार्दिक इच्छा भारतीयों के खिलाफ जेहाद में मरना है, ताकि हम जन्नत में अपना स्थान बना सकें”.

आतंकवाद और इस्लाम एक ही सिक्के के दो पहलु

९ जनवरी, २००१ को उलूम हकाकिया नामक स्थान में सभी इसलामी तथा गुरिल्ला गुटों का प्रतिनिधित्व करते हुए तीन सौ प्रमुख मुस्लिम धर्म-प्रचारकों ने घोषणा की की एक महान मुस्लिम योद्धा ओसमा बिन लादेन की सुरक्षा करना दुनिया भर के मुसलमानों का धार्मिक कर्तव्य है.

पाकिस्तान के सभी बड़े बाजारों में हर तीसरी या चौथी दुकान में जेहादी गुटों के लिए दान पात्र रखे जाते हैं, क्योंकि आतंकवादियों की मदद करना अल्लाह की नजर में अच्छा कार्य है. इसलामी स्कूल या मदरसों तथा प्रत्येक मस्जिद के एक हिस्से को जेहाद के केंद्र के रूप में बदल दिया गया है. वे कट्टर इस्लामी योद्धाओं के लिए उत्पत्ति के आधार हैं. जेहाद में अपने बच्चों को खो चुके परिवारों को आतंकवादी गुटों द्वारा वित्तीय मदद दी जाती है.

पाकिस्तान के फैसलाबाद की जामिया मस्जिद से पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री वाले आतंकवादी अबू जिंदल जो सन १९९५ में भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा कश्मीर में पकड़ा गया था उसने जेहाद का धार्मिक सिद्धांत बताया, “एक सच्चा मुसलमान सिर्फ अल्लाह के लिए लड़ता है. वह सिर्फ और सिर्फ अल्लाह है, जो यह फैसला करता है कि एक मुसलमान को कैसे मरना चाहिए. ऐसे सभी क्षेत्र, जो मुसलमानों के हैं और उनपर दूसरों का कब्जा है, उन्हें स्वतंत्र होना चाहिए और वह स्वतंत्र होंगे. मैं यहाँ इसलिए आया हूँ क्योंकि यह एक मुस्लिम क्षेत्र है, जिस पर गैर-मुसलमानों का शासन है. हम यहाँ धर्म के लिए आये हैं. आर्थिक और भौतिक कारक मेरे लिए कोई अर्थ नहीं रखते.”

एक रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में अन्य देशों के मुस्लिम युवक भारतीय सेना के खिलाफ कथित जेहाद में शामिल है. विदेशी समर्थन के कारण ही कश्मीर तथा भारत के अन्य हिस्सों में जेहाद इतने दिनों से टिका हुआ है. जमायत-उल-मुजाहिद्दीन के नेता शुलेम रसूल शाह का दावा है कि जेहादियों को कश्मीर के स्थानीय लोगों का समर्थन भी हासिल है. तैमूर सिद्दीकी पाक अधिकृत कश्मीर के एक आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर से लौट कर लिखता है, “जेहादी शिविरों में थका देनेवाले प्रशिक्षण ने युवा और दृढ लड़ाकुओं की एक नस्ल तैयार की है, जिनके लिए जेहाद स्वर्ग जाने का रास्ता है. यहाँ भावी मुजाहिद्दीन अपने जीवन को इस्लाम के उपदेशों के अनुसार परिवर्तित करना सीखते हैं.

एक पूर्व आतंकवादी के अनुसार, अल्लाह के आशीर्वाद तथा मदद का वादा स्वर्ग का स्वप्न तथा उसके उपहार (७२ हूर) युवा जेहादियों के लिए प्रमुख प्रेरक बल होते हैं. भारत थका हुआ है और लड़ाई से मुक्ति चाहता है; लेकिन हम भारतीय सेना को तबतक आराम नहीं करने देंगे जबतक कश्मीर उससे अलग न हो जाए. लश्कर तोइबा के एक आतंकवादी ने साक्षात्कार में कहा, “मेरी इच्छा है कि मैं शहीद कहलाऊं. मेरा पूरा परिवार जेहाद के प्रति समर्पित है. लश्कर तोइबा प्रमुख हाफिज सईद का कहना है, “हम सभ्यताओं के टकराव में विश्वास रखते हैं. जेहाद का आखिरी लक्ष्य अन्य सभ्यताओं पर इस्लाम का प्रभुत्व कायम करना है.

इंजिनियर पिता का एकमात्र पुत्र डॉ मोअजिम शेख लशकर-ए-तोइबा में शामिल होने के लिए प्रेरित हुआ. उसे एक आत्मघाती मिशन के लिए चुना गया. उसकी माँ ने इस्लाम के हित के लिए शहादत की प्रार्थना की. वह ७ अप्रैल, २००१ को जम्मू सेक्टर के डोडा में एक मुठभेड़ में मारा गया. फिदायीन सदस्यों में जेहादी जोश उत्पन्न करने के लिए उन्हें इतिहास के इसलामी योद्धाओं का नाम दिया जाता है.(द जेहाद फैक्ट्रीज, फ़्रोंट लाइन, लेखक-मसंद अंसारी)

मदरसा आतंकवाद की फैक्ट्री

ज्ञातव्य है कि पाकिस्तान की मीडिया में भी इस बात पर बहस चलता रहता है कि मदरसों को आतंकवाद की फैक्ट्री बनने से कैसे रोका जाय परन्तु वास्तविक धरातल पर अभीतक कुछ भी सम्भव नहीं हुआ है. राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए हजारों मदरसों पर प्रतिबंध लगाया था परन्तु उसकी कीमत मुशर्रफ को चुकानी पड़ी और अब उनके सुर बदल चुके हैं. इसी तरह मिश्र ने आतंकवाद पर नियंत्रण के लिए २७००० मदरसों पर प्रतिबंध लगा दिया है और अभी ट्युनिसिया ने आतंकवादी हमले के बाद संदिग्ध ८० मस्जिदों पर ताले जड़ दिए या ढहा दिए.

मदरसों में विज्ञान और गणित की शिक्षा दो कारणों से नहीं दी जाती है:

१. मदरसे के जेहादी विद्यार्थी यदि पूछेंगे की हमारे कौन कौन से महान जेहादी विज्ञान और गणित के विद्वान थे और उनका क्या योगदान था तो वे इसका जबाब क्या देंगे जबकि कुरआन पढ़ाकर जेहादि विद्यार्थियों को बता सकते हैं की हमारे नबी और रसूल निरक्षर होते हुए भी केवल अल्लाह की कृपा से एक से एक तथाकथित महान काम किये. अकबर और अल्लाउद्दीन खिलजी अंगूठा छाप होते हुए भी भारत के महान शासक बने और ये विज्ञान और गणित पढकर नहीं केवल कुरान पढकर बने.

२. मदरसे के जेहादी विद्यार्थियों को यदि विज्ञान और गणित पढाया जायेगा तो कुरान में अल्लाह के हवाले से जो अवैज्ञानिक और मूर्खतापूर्ण बातें लिखवाई गई है उसका पोल खुल जायेगा और बच्चे जेहादी (आतंकवादी) नहीं बन पाएंगे.

भारत पाकिस्तान के बीच राजनितिक नहीं जेहादी संघर्ष है

जो लोग यह कहते हैं कि केवल कश्मीर भारत-पाकिस्तान की समस्या की वजह है वे भ्रम के शिकार हैं. इस समस्या की गम्भीरता खुद मुशर्रफ के शब्दों में व्यक्त होता है जो हम भारतवासियों की आँखें खोलने वाली है. परवेज मुशर्रफ ने १९९९ में कराची में भाषण देते हुए कहा, “कश्मीर मुद्दे का समाधान होने पर भी हिंदुस्तान के खिलाफ जंग जारी रहेगी. हमारा लक्ष्य सिर्फ कश्मीर नहीं है.”

कश्मीर मुद्दे के निपटारे के बाद तनाव क्यों जारी रहेगा इसे स्पष्ट करते हुए ब्रिगेडियर ए आर. सिद्दीकी ने प्रकाश डाला की “कश्मीर का लम्बा और कड़वा अध्याय समाप्त होने के बाद भी हिंदुओं की अधिक संख्यावाले भारतीय समाज में मुसलमानों की स्थिति भारत पाक सम्बन्धों को खराब बनाने वाली एक और वजह होगी.” और इसकी अभिव्यक्ति जेहादियों के कैम्पों में हिंदुस्तान को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के नारों में दिखाई पड़ती है.

जरा सोचिये, इन पाकिस्तानियों के हिंदुओं और हिन्दुस्तान के विनाश के लिए सतत प्रयत्न के विरुद्ध हम अपनी, अपने परिवार, अपनी संतति और अपने देश की सुरक्षा के लिए क्या कर रहे हैं? किसी भी देश की सेना दूसरे देश की सेना से लड़ सकती है, किसी देश के पूरी जनता से नहीं. अब तो कई अन्य आतंकवादी संगठन भी इस्लाम और जेहाद के नाम पर भारत के विरुद्ध पाकिस्तान से आ मिला है जिनमे प्रमुख है अलकायदा, तालिबान और शायद इस्लाम का सबसे घिनौना चेहरा आईएसआईएस भी.

ऐसी परिस्थिति में जहाँ हर घर से कम से कम एक व्यक्ति को सेना और सुरक्षा के लिए आगे आने की आवश्यकता है वहाँ हम सिर्फ अपने बुढ़ापे की लाठी पैदा करने के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहे हैं और अपने ही देश में गर्व से अल्पसंख्यक (१९४७ में हिंदू ८७% से घटकर २०११ में ७४%) बनने को अग्रसर हैं. सवाल है राष्ट्र की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? उसके लिए क्या आसमान से लोग पैदा होंगे? जब पाकिस्तान का बच्चा बच्चा हिन्दुस्तान की बर्बादी की तैयारी में है तो क्या राष्ट्र की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी नहीं है? अरे राष्ट्र को छोड़ो, क्या हम अपने परिवार और बच्चे की सुरक्षा की तैयारी कर रहे हैं?

क्या जबतक इन जेहादियों के नापाक हाथ हमारे बहन बेटियों तक नहीं पहुँच जायेंगे, उनकी तलवारे हमारे गर्दन नापने के लिए नहीं उठेंगे तबतक हमने ना सुधरने की कसमें खा ली है? वे अपना तन-मन-धन सब हमारे विनाश के लिए झोंक रहे हैं और हम खाने, सोने, अधिक से अधिक पैसा कमाने और कम से कम बच्चे पैदा करने के आलावा और क्या कर रहे हैं? सभी मानते हैं कि देश में आजाद और  भगत सिंह की आवश्यकता है, परन्तु वो पड़ोस के घर में पैदा हो ताकि हमारे सुख-शांति में कोई खलल न आये. परन्तु याद रखना. यदि आज तुम अपनी तंद्रा से नहीं जागे, तो निकट भविष्य में ही तुम्हे चैन से सोना नसीब नहीं होगा. और यदि आप समझ रहे हैं कि यह सब सिर्फ पाकिस्तान में हो रहा है तो आप भ्रम में हैं. जो स्वप्न पाकिस्तानी खुली आँखों से देख रहे हैं वही स्वप्न हिन्दुस्तान के मुसलमान बंद आँखों से देख रहे हैं, पढिये:

“आज कौन सा दर्द रखनेवाला दिल है जो मुसलमानों की आजकल की गिरावट और उनके आजकल के जलीलपन और बुरी हालात पर नहीं दुखता है! और कौन सी आँख है जो उनकी गरीबी, कमजोरी, बेरोजगारी पर आंसू न बहाती हो! हुकूमत उनसे छिनी दौलत से यह महरूम हुए! इज्जत और दबदबा इनका खत्म हुआ! ज़माने के हर मुसीबतों का शिकार मुसलमान बन रहे हैं. इन हालात को देखकर दर्दमंदों का कलेजा मुंह को आता है. मुसलमानों की बादशाही गयी, दौलत गयी दबदबा गया सिर्फ एक वजह से वो ये की हमें मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की शरीअत की बातें छोड़ दी”. (किताब-इस्लामी जिंदगी, लेखक-मुफ्ती अहमद यार खां, गौसिया पब्लिशर, इलाहाबाद)

और याद रखिये, कश्मीर पर जब पाकिस्तान ने आक्रमण किया था तो कश्मीर रियासत का मुस्लिम सेना और मुसलमान पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर कश्मीरी हिंदुओं पर कहर बरपाई थी. ये कल भी होगा क्योंकि दोनों के स्वप्न समान है, दोनों के फितरत समान, दोनों के मजहब भी समान हैं और मजहब आज भी निर्विवाद रूप से लोगों को जोडने में चासनी का काम करता हैं.

मैंने इतिहास पढ़ा है और दर्जनों एसी सभ्यताएँ देखी है कि जिस सभ्यता में संघर्ष की उर्जा क्षीण पड़ गयी वह सभ्यता दूसरे के हाथों समाप्त हो गयी. मुझे यह कहने में कतई संकोच नहीं है कि वर्तमान में हिंदू सभ्यता में संघर्ष की उर्जा क्षीण होती जा रही है जबकि दूसरी सभ्यता विस्तार के लिए सतत संघर्षशील है. यदि संख्याबल से ही उन्हें रोकना सक्षम होता तो भारत अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बंगलादेश और कश्मीर न बना होता.

हिन्दुस्थान के विनाश के लिए प्रयत्नशील प्रमुख आतंकवादी सन्गठन

हिन्दुस्तान और हिंदुओं को समाप्त करने का सपना देख रहे और तैयारी कर रहे प्रमुख आतंकवादी संगठन निम्नलिखित है:  

अ.    पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन

१. जमायत-उल-मुजाहिद्दीन २.जमायत-उल-उलेमा-ए-इस्लाम-कट्टर शिया विरोध हनफी सम्प्रदाय के आतंकवादी ३.      हरकत उल मुजाहिद्दीन (पवित्र योद्धाओं का आंदोलन)-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देना ४.      लश्कर ए तोइबा (मदीना के सिपाही)-मुख्य और सरकारी आतंकवादी संगठन, उद्देश्य- हिंदुओं को समाप्त कर पुरे भारत को इस्लामीकरण करना ५.    जमात ए इस्लामी ६. हरकत उल मुजाहिद्दीन (हरकत उल अंसार)-कट्टर सुन्नी आतंकवादी गुट ७. तबलीगी जमात ८. अल बद्र ९. जैश ए मुहम्मद-कट्टर सुन्नी इस्लामिक आतंकवादी गुट १०. तालिबानी गुट, साथ ही आईएसआई और पाकिस्तानी सेना

ब.    पाकिस्तान समर्थक/समर्थित भारतीय आतंकवादी संगठन

१. हिजबुल मुजाहिद्दीन २. हुर्रियत कांफ्रेंस ३. जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ़्रोंट ४. इंडियन मुजाहिद्दीन ५. स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया ६. हुजी आदि

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5 thoughts on “पाकिस्तान के मदरसों में बन रही है हिन्दुस्थान को खत्म करने कि रणनीति

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