ऐतिहासिक कहानियाँ, मध्यकालीन भारत

बंगाल का प्रयागराज त्रिवेणी संगम, हूगली और वहां के विष्णुमन्दिर की कहानी

vishnu mandir
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A true history of Triveni, Hooghly of Bengal; you must not have been taught.

दक्षिण बंगाल के सप्तग्राम (हूगली जिले में) में मान नृपति नाम का एक स्थानीय क्षत्रप था. प्राचीनकाल में सप्तग्राम एक विश्वप्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय व्यापार क्षेत्र था. यह बंगाल का प्रसिद्ध बन्दरगाह था. सप्तग्राम एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल भी था. इसी सप्तग्राम में पवित्र तीर्थस्थल त्रिवेणी था. बंगाल के हूगली जिले में त्रिवेणी बंडेल से ४ किमी दूर, बांसबेरिया, शिवपुर में है. यहाँ गंगा के साथ यमुना की एक धारा और दक्षिण सरस्वती की एक धारा (सोलहवीं सदी तक) आकर मिलती थी इसलिए इसे दक्षिण का प्रयाग भी कहा जाता था. प्रयागराज के संगम को युक्तवेणी और त्रिवेणी, हूगली के संगम को मुक्तवेणी कहा जाता था. हर साल मकरसंक्रांति को यहाँ मेला लगता था. इस तीर्थस्थल की चर्चा महाभारत और भागवत पुराण में भी है.

सप्तग्राम नाम प्रसिद्ध सप्तऋषियों के नाम पर पड़ा था जो वैदिक काल में यहाँ आकर पवित्र त्रिवेणी में स्नान किये थे और वर्षों निवास किये थे. इन सातों ऋषियों के नाम पर यहाँ सात गाँव था जिसके कारन यह क्षेत्र सतगांव अब सप्तग्राम कहलाता है. यह एक समय विकसित शहर था और दक्षिण बंगाल की राजधानी भी होता था.

तेरहवीं सदी की बात है. एकदिन सप्तग्राम में आकर रहनेवाले एक मुस्लिम ने अपने पुत्र के खतना के अवसर पर गाय काटकर भोज किया. यह खबर पूरे बंगाल में आग की तरह फ़ैल गया. हिन्दुओं केलिए गौ माता के सामान पूजनीय और पवित्र थी. वेदों में गौ वध का निषेध है और गौ की हत्या पर मृत्युदंड का विधान है. लोग गुस्से से लाल हो गये थे. उस समय बंगाल में सभी हिन्दू थे. आक्रमणकारी मुसलमान बंगाल की पवित्र माटी को पददलित करना शुरू ही किये थे. उस समय नीच, हिन्दू विरोधी वाममार्गी असुरों का भी बंगाल में नामोनिशान तक नहीं था. इसलिए पवित्र तीर्थस्थल सप्तग्राम में गौवध से सभी हिन्दू आहत और क्रोधित थे. उन्होंने मान नृपति से उसे विहित दंड देने की मांग की. राजा मान नृपति ने उस मुसलमान के बेटे को प्रचलित कानून के अनुसार मौत की सजा दी और उसे मौत के घाट उतार दिया गया.

इस बात से दुखी होकर उस मुसलमान परिवार ने अपने राजा मान नृपति की शिकायत दिल्ली सल्तनत में जाकर कर दी. दिल्ली सल्तनत का बादशाह फिरोज शाह ने जफर खान गाजी के नेतृत्व में विशाल सैनिक भेजकर राजा को दण्डित करने का आदेश दिया. जफर खान गाजी के साथ उसका दायाँ हाथ और भांजा शाह सूफी भी था. उन दोनों ने हिन्दुओं के कत्लेआम और राजा सहित सभी को मुसलमान बनाने के उद्देश्य से सप्तग्राम पर हमला कर दिया. मान नृपति ने उनका डटकर मुकाबला किया और उसका भांजा शाह सूफी को मार गिराया जो आज पांडुआ में दफन है. अगले दिन के युद्ध में मान नृपति को हार का सामना करना पड़ा. सप्तग्राम पर मुसलमानों ने अधिकार कर लिया और फिर वहां भी हिंसा, नरसंहार, बलात्कार, जबरन धर्मांतरण, मन्दिरों को तोड़ने तथा बड़े मन्दिरों, मठों को मस्जिद और मदरसा बनाने का वही नंगा नाच शुरू हो गया जो अरब से लेकर सिंध और भारत में अबतक होता आ रहा था. मान नृपति को भी बहुत तरह से प्रताड़ित कर जबरन मुसलमान बना दिया गया (जिससे आहत उसने सम्भवतः आत्महत्या कर लिया). उसने पवित्र तीर्थस्थल त्रिवेणी संगम पर स्थित विश्वप्रसिद्ध विशाल विष्णुमन्दिर को लूटा और भ्रष्टकर उसे मस्जिद बना दिया.

विष्मणुन्दिर का पूर्वी द्वार और मंगल घाट

हूगली के राजा भूदेव जफर खान गाजी के इस भयानक कुकृत्य पर क्रोध से लाल हो गये. उन्होंने जफर खान गाजी को ललकार कर हमला कर दिया. प्रचंड युद्ध हुआ. राजा भूदेव ने जफर खान गाजी का सिर भुट्टे की तरह काटकर फेंक दिया जो आजतक नहीं मिला. जफर खान गाजी की सेना दुम दबाकर भाग गयी.

विश्वप्रसिद्ध विष्णुमन्दिर का क्या हुआ?

यही त्रिवेणी हूगली का विष्णुमन्दिर था

यहाँ हिन्दुओं से फिर गलती हुई. आवश्यकता इस बात की थी कि वे जफर खान गाजी के भागते हुए सेना का पीछा कर उसे बंगाल की पवित्र धरती से जड़ मूल सहित खत्म कर देते पर एसा करने से चूक गये जिसका परिणाम अच्छा नहीं हुआ. जफर खान गाजी का पुत्र उघवान खान ने अपने बाप जफर खान गाजी का धड़ उसी मस्जिद में जो कुछ दिन पहले तक विश्वप्रसिद्ध विष्णुमन्दिर था लाकर मन्दिर के गर्भगृह में दफना दिया. अब वही विष्णुमन्दिर “जफर खान गाजी मस्जिद और दरगाह” के रूप में जाना जाता है.

स्थानीय लोग आज भी इस जफर खान गाजी मस्जिद और दरगाह के बारे में जानते हैं कि यह एक मन्दिर था. इसके मन्दिर होने की जानकारी मुझे एक स्थानीय व्यक्ति से ही मिला था. ब्रिटिश रिकार्ड में इसी को त्रिवेणी मन्दिर के रूप में वर्णन किया गया है और यह मन्दिर खुद चीख चीख कर कहता है कि मैं मन्दिर हूँ. इन सबके बाबजूद सेकुलर सरकार, वामपंथी इतिहास्यकार और Archaeological Survey of India (ASI) इसे मस्जिद और मकबरा घोषित कर रखा है.

पश्चिमी दीवार पर पवित्र कमलचक्र और लटकता फूल

वामपंथी इतिहास्यकार और विकिपीडिया बताता है कि “जफर खान गाजी मस्जिद और मकबरा” हिन्दुओं और बौद्धों के मन्दिरों के मलबे से बना है. अगर यह सत्य है तो फिर वामपंथी इतिहास्यकारों और विकिपीडिया को यह भी बताना चाहिए की जफर खान गाजी ने किन किन हिन्दू मन्दिरों और बौद्ध मन्दिरों को तोड़कर उनके मलबे से इसको बनाया था और वह मलबा कितने अरबी गदहों पर लादकर कब और कहाँ से लाया गया था. सबसे बड़ी बात ये है कि तथाकथित मुस्लिम इमारतें पूरे भारत में हमेशा बना हुआ की जगह तोड़ा हुआ ही क्यों होता है? वामपंथी धूर्तों के पास इसका कोई जबाब नहीं होता है क्योंकि इमारते खुद बोलती है कि मुस्लिम आक्रमणकारियों ने हमें बनाया नहीं है बल्कि इमारत पर बने मूर्तियों को तोड़कर, चित्रों को घिसकर और तोड़फोड़ कर जबरन कब्जा किया गया है.

इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश ओक लिखते हैं, “Invaders are never constructor, they are only destructor.”

वे लिखते हैं की “भारत से लेकर अरब तक जिन प्राचीन एतिहासिक इमारतों को इस या उस मुसलमानों के द्वारा बनाई बताई जाती है वे सब हिन्दुओं की हैं, यहाँ तक की ताजमहल और लाल किला भी. मुसलमानों ने सर्वत्र हिन्दू इमारतों, मन्दिरों, मठों, पाठशालाओं आदि का केवल विनाश किया है निर्माण कुछ भी नहीं.”

उत्तरी प्रवेशद्वार अब बंद है

और ये सत्य है. मैंने खुद दर्जनों तथाकथित मुस्लिम इमारतों, मस्जिदों, मकबरों, दरगाहों आदि का बारीकी से निरिक्षण किया है और उनकी बातों को लगभग सत्य पाया है. तथाकथित जफर खान गाजी मस्जिद और मकबरा से सम्बन्धित जो कुछ चित्र मैंने शामिल किया है उसको देखिये और आगे जो सबूत रखने जा रहा हूँ वह पुरे भारत में सेकुलर सरकार, वामपंथी इतिहास्यकार और ASI के षड्यंत्र को उजागर कर देगा. इन तीनों का काम यही है कि यदि किसी डाकू ने आपके घर पर जबरन अधिकार कर उस पर अपने नाम का बोर्ड लगा दिया है तो फिर उसे उसी डाकू द्वारा निर्मित उस डाकू का घर घोषित कर देना. फिर आप लाख हाथ पैर पटकते रहें, सबूत देते रहें पर इन्हें न दिखाई देगा और न सुनाई देगा.

त्रिवेणी, हूगली के विष्णुमन्दिर का इतिहास

नदी घाट की तरफ विष्णुमन्दिर का प्रवेश द्वार

बंगाल के इतिहास लिखने वाले मार्शमैन के अनुसार इस त्रिवेणी मन्दिर का निर्माण उड़ीसा के मुकुंद देव ने करवाया था. ब्रिटिश अधिकारी डी मणी ने अपने विवरण में इसे अति प्राचीन मन्दिर बताया है जो मुकुंद देव द्वारा करवाए गए मन्दिर निर्माण (या पुनर्निर्माण) से पहले भी अस्तित्व में था. राखाल दास बनर्जी जिन्होंने मोहन जोदड़ों की खुदाई की थी उन्होंने भी इसे मन्दिर बताया है. उन्होंने बताया की “Dargah of Zafar Khan Ghazi was a Hindu temple, with the Eastern chamber serving as a ‘Naath-mandir’ or ‘Jag-mohan’ and the Western chamber serving as the sanctum sanctorum or ‘garbha-griha’.

जफर खान गाजी मस्जिद और दरगाह के मन्दिर होने का पुरातात्विक साक्ष्य आपको तस्वीर देखकर मिल जायेगा. लिखित साक्ष्य आपको ब्रिटिश रिकार्ड से दिखाता हूँ जिसका वर्णन बंगाल सिविल सेवा के अधिकारी डी मणी ने An Account of the Temple of Triveni near Hugli, by D. Money, Esq. Bengal Civil Service के नाम से १८४७ में किया था. जिसे द एसियाटिक सोसायटी, कोलकाता ने जर्नल वोलुम १६, पार्ट-१ के नाम से प्रकाशित किया था. इस दस्तावेज के पृष्ठ संख्या ३९३ से ४०१ पर इस मन्दिर का वर्णन है जो गूगल बुक पर उपलब्ध है.

ब्रिटिश रीकोर्ड में त्रिवेणी, हूगली के विष्णुमन्दिर के बारे में क्या लिखा है

उत्तरी दरवाजे पर देवी देवताओं की मूर्तियों को तोड़ दिया गया है

ब्रिटिश अधिकारी डी मणी अपने विवरण में लिखते हैं, “The temple originally must have occupied a large space and consisted of 3 or 4 Courts. On ascending two or three broken steps to the first Court you perceive on your right a part of the original temple, consisting of two rooms, of which there remain only the massy walls that enclose them and the doors by which you enter. You are struck at once with the solidity of the masonry, which but for Mahomedan aggression and Mahomedan sacrilege would have defied till now the ravages of time. (p.393)

वह आगे मन्दिर के कक्ष में दफन मुर्दे की कब्र को देखकर लिखते हैं, “A Mahomedan tomb desecrates one of the rooms, the inscription on which presents a passage in the history of the temple. (p.394)”

मन्दिर के भीतर प्रवेशद्वार

ब्रिटिश अधिकारी डी मणी मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा मन्दिरों और मठों को नष्ट करने के तरीकों को याद करते हुए लिखते है, “Here as in the other the hand of the invader and destroyer has been at work, and the demolition and displacement of the original masonry, the subsequent patchwork, and the superadded dome, are evidences of the ruthless and fanatical spirit, which marked in every clime and through every era, ere the power of the Crescent waned, its desolating course. (p.394)”

मन्दिर में गंगा स्तुति संस्कृत और बांग्ला में लिखा है

दीवार पर संस्कृत में श्लोक

इस इमारत में जगह जगह बांग्ला और देवनागरी लिपि में संस्कृत के श्लोक लिखे हुए हैं. एक जगह गंगा स्तुति का वह श्लोक खुदा हुआ है जिसे त्रिवेणी में स्नान करते वक्त सभी साधू संत और आम लोग बोलते थे:

सुरधुनि मुनिकन्ये तारयेः पुण्यवन्तं स तरति निजपुण्यैस्तत्र किन्ते महत्त्वं ।

यदि च गतिविहीनं तारयेः पापिनं मां तदपि तव महत्त्वं तन्महत्त्वं महत्त्वं।I

“Oh Suradhuni Gunga, the daughter of Janhoo Muni, what will be thy greatness if thou wilt bestow salvation on the virtuous, who are saved by their own merits! If thou bestowest salvation on me, a helpless wretch, I would then proclaim thy glory to the highest extremity” (P.396)

गर्भगृह में संस्कृत श्लोक

त्रिवेणी मन्दिर दशावतार विष्णुमन्दिर था

१८७२ में ब्रिटिश पुरातत्व सर्वेक्षक जोसेफ बेगलर द्वारा लिया गया चित्र, साभार ब्रिटिश लायब्रेरी

त्रिवेणी विष्णुमन्दिर में दस कक्ष थे, पांच पूर्वी ओर से और पांच पश्चिमी ओर से. क्या आजतक आपने एसा कोई मस्जिद या मकबरा देखा या सुना है जिसमें दस मन्दिर हों? आप तस्वीरों में देखेंगे की दीवालों पर भी भगवान विष्णु के दशों अवतार की मूर्तियाँ बनी हुई है. जिस कक्ष को बौद्ध मन्दिर को तोड़कर लाये गये मलवे से बना बताया जाता है वो दरअसल बुद्ध भगवान का मन्दिर होगा. इमारत के दीवारों पर रामायण और महाभारत की कथाएं लिखी हुई हैं:

रामायण:

दीवार पर दशावतार

सीता विवाह Sita Vivaha

खर त्रिशरा वध Khara Trisiras Vadh

राम रावण युद्ध Rama Ravana yudh

सीता निवास राम अभिषेक Sita Nivash Ram Abhishek

भरत अभिषेक Bharat Abhisek

महाभारत :

दीवार पर भगवान विष्णु के दशावतार

धृष्टदयुम्न दुशासन युद्ध Dhrishtadyumna Dussasana Yudh

कृष्ण बाणासुर युद्ध Krishna Banasura Yudh

चाणूर वध Chanoor Vadh

कंस वध Kamsa Vadh   (p.398 )

पर नवग्रह की मूर्तियाँ

ब्रिटिश अधिकारी आगे लिखते है, “There are also near the northern and eastern entrances images of some of the Hindoo gods, such as Narasingha, Varāha, Ráma, Krishna, Lukshmi, &c. &c., most of them much defaced. The stones with the inscriptions were probably placed below some of these deities or others that have been destroyed, and as these deities are peculiar to the worship of “Vishnu”, it is most likely that the temple was consecrated to that deity that is Vishnu”. (p.398)

दीवार पर वैदिक अनाहत चक्र

विश्वप्रसिद्ध विष्णुमन्दिर को मस्जिद और मकबरा में बदल देने और हूगली पर आक्रमणकारी मुसलमानों का अधिकार हो जाने के कारण प्रयागराज की तरह ही प्रसिद्ध प्राचीनतम तीर्थस्थल हूगली के त्रिवेणी में लोगों का आना जाना बंद हो गया और यह तीर्थस्थल वामपंथी इतिहास के पन्नों से भी बाहर हो गया क्योंकि वामपंथी हर उस इतिहास को खत्म कर देते हैं जो आक्रमणकारियों को लांक्षित करता हो. बंगाल के इस्लामी शासन में  परित्यक्त हो जाने के कारण यमुना की छोटी धारा भी सूख गयी और सोलहवीं सदी में दक्षिण सरस्वती नदी भी लुप्त हो गयी.

दरअसल सेकुलर कांग्रेस सरकार, उसके जिहादी शिक्षा मंत्रियों और वामपंथी इतिहास्यकारों ने मिलकर प्रारम्भ से ही भारत के इतिहास के नाम पर झूठ फ़ैला रखा है. उनके षड्यंत्र और दबाब में ASI के कर्मचारी भी शामिल हो सकते है. होना यह चाहिए था कि कम से कम आजादी के बाद मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा अधिग्रहित हिन्दूओं के मन्दिरों, मठों, पाठशालाओं तथा भवन, किला आदि को हिन्दुओं को वापस लौटा देना चाहिए था. परन्तु वे एसा करने की जगह मुस्लिम तुष्टिकरण केलिए हिन्दुओं को मुर्ख बनाकर उन्हें जबरन मुसलमानों द्वारा बनाया हुआ साबित करने में लगे हुए हैं. सबकी किस्मत सोमनाथ मन्दिर की तरह नहीं होता; अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि को ५०० वर्ष संघर्ष करना पड़ा तो काशी और मथुरा का मन्दिर अभी भी अधर में लटका हुआ है. शेष हजारों मन्दिर, मठ और हिन्दू इमारतें त्रिवेणी के विष्णुमन्दिर की तरह आज भी इतिहास के पन्नो में दफन अपने उद्धार की राह देख रहे हैं.

दीवार पर हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियाँ

इसी तरह ब्रिटिश पुरातत्व सर्वेक्षक बैगलर ने दिल्ली के कुतुबमीनार और वहां के मन्दिरों तथा अन्य इमारतों को भी हिन्दू मन्दिर और हिन्दू इमारतें घोषित कर रखा है पर सेकुलर सरकार, वामपंथी इतिहास्यकार और ASI बेशर्मी से उन्हें मुस्लिम इमारत घोषित कर रखा है.

१.     गाजी का मतलब होता है हिन्दुओं का हत्यारा. जो अधिक से अधिक हिन्दुओं और बौद्धों की हत्या करता था उसे गाजी की उपाधि दी जाती थी.

२.            दक्षिण बंगाल में कई बार शताब्दियों तक उड़ीसा के राजाओं का अधिकार रहा है

मुख्य स्रोत: An Account of the Temple of Triveni near Hugli, by D. Money, Esq. Bengal Civil Service के नाम से प्रकाशित द एसियाटिक सोसायटी का जर्नल वोलुम १६, पार्ट-१

अन्य स्रोत: Wikipedia (Wikipedia ने जफर खान गाजी और बहराम खान को घालमेल कर दिया है जिसके कारन बहुत सी त्रुटियाँ दिखाई देती है. ये दोनों अलग अलग व्यक्ति थे)

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